
Waqf Amendment Bill 2024: जमीयत उलेमा-ए-हिंद (AM) ने वक्फ बिल विधेयक के खिलाफ अपने अभियान को तेज कर दिया है। जमीयत ने TDP के चंद्रबाबू नायडू और जनता दल (United) के नीतीश कुमार से इस मामले में मुसलमानों की भावनाओं पर ध्यान देने को कहा है। जमीयत का कहना है कि NDA में शामिल जो दल खुद को धर्मनिरपेक्ष बताते हैं, उन्हें इस खतरनाक विधेयक का समर्थन नहीं करना चाहिए।
BJPसरकार की दो बैसाखी
जमीयत ने ये भी कहा कि यह सरकार दो बैसाखियों पर चल रही है- एक मजबूत बैसाखी हैं चंद्रबाबू नायडू और दूसरे हैं बिहार के नीतीश कुमार।'अगर वक्फ विधेयक मुसलमानों की भावनाओं को नजरअंदाज करके पारित किया गया, तो इसकी जिम्मेदारी बैसाखियों की भी होगी।' मैंने नायडू को आमंत्रित किया था। लेकिन उन्होंने मना कर दिया और अपनी पार्टी के उपाध्यक्ष नवाब जान को भेजा। मैं इसे सकारात्मक रूप में देखता हूं, क्योंकि वह यहां मौजूद लोगों की भावनाएं बताएंगे।'
नेहरू ने दिया था जमीयत को आश्वासन
मदनी ने कहा कि स्वतंत्रता से पूर्व कांग्रेस के तत्कालीन नेता मोतीलाल नेहरू और जवाहपलाल नेहरू ने जमीयत को आश्वासन दिया था कि आजादी के बाद मुल्क धर्मनिरपेक्ष रहेगा। इसके साथ ही मुसलमानों के धार्मिक एवं सांस्कृतिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। लेकिन उत्तराखंड में भाजपा की सरकार, समान नागरिक संहिता लेकर आई। उन्होंने कहा कि इसका मकसद मुसलमानों को उनके मजहब से दूर करना तथा सरकार निजी मामलों को लेकर जो कानून बनाए, उनका पालन कराना है।
'हिंदू-मुसलमान भाई-भाई'
उन्होंने आगे कहा कि'केंद्र सरकार को उनकी रक्षा करनी चाहिए। क्योंकि हम इस देश में रहते हैं और हम बाहर से नहीं आए हैं। अगर एक हिंदू गुज्जर है, तो एक मुसलमान भी गुज्जर है। अगर एक हिंदू जाट है, तो एक मुसलमान भी जाट है। वे नारे लगाते हैं कि हिंदू, मुसलमान और सिख अलग हैं। लेकिन हम कहते हैं कि हिंदू, मुसलमान, सिख और ईसाई सब भाई-भाई हैं।
वक्फ की ज़मीन हड़पने की कोशिश
मदनी आगे कहते हैं कि 'दिल्ली में इतनी सारी मस्जिदें हैं, जिनमें से कुछ 400-500 साल पुरानी हैं। भारत में एक वर्ग है जो इन मस्जिदों को हड़पने की कोशिश कर रहा है। कौन 500 साल पुराने दस्तावेज़ पेश कर सकता है? कानून कहता है कि जो भी मस्जिद वक्फ भूमि पर बनी है, वह वास्तव में वक्फ की है।' अगर मुसलमानों की भावनाओं की अनदेखी करते हुए वक्फ विधेयक पारित किया जाता है तो इसके लिए केंद्र सरकार का समर्थन कर रही 'बैसाखियां' भी जिम्मेदारी होंगी।
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