
India-China border tension: भारत और चीन के बीच चार साल से चल रहा सीमा तनाव अब धीरे-धीरे समाप्त होता दिख रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की हालिया मुलाकात के बाद चीनी सेना ने अपनी टुकड़ियाँ पीछे खींचने का फैसला किया है। पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में भारत और चीन के सैनिकों की डिसइंगेजमेंट प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यह दोनों देशों के बीच हुए महत्वपूर्ण समझौते का नतीजा है।
सैनिकों की वापसी और स्थिति में सुधार
पूर्वी लद्दाख के डेमचोक और देपसांग क्षेत्रों में भारतीय और चीनी सैनिकों की वापसी चल रही है। हाल के दिनों में चीनी सेना ने अपने टेंट और अस्थायी संरचनाएँ हटाना भी शुरू कर दिया है। बुधवार को डेमचोक में दोनों पक्षों ने एक-एक टेंट हटाया। गुरुवार को भी कुछ अस्थायी ढाँचे तोड़े गए। कुल डिसएंगेजमेंट प्रक्रिया में अब तक 40 फीसदी प्रगति हो चुकी है। भारत और चीन की सेनाएं अपने अस्थायी ढांचे हटा रही हैं। इससे क्षेत्र की स्थिति में सुधार हो रहा है।
सैटेलाइट तस्वीरों से हुई पुष्टि
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत द्वारा चीन के साथ गश्त व्यवस्था पर सहमति की घोषणा के बाद, पूर्वी लद्दाख के देपसांग और डेमचोक में स्थिति की पहली सैटेलाइट तस्वीरें सार्वजनिक की गई हैं। 11अक्टूबर को ली गई एक तस्वीर में चार गाड़ियाँ और दो टेंट दिखाई दे रहे थे। हाल ही में ली गई तस्वीरें स्पष्ट करती हैं कि टेंट हटा दिए गए हैं। बख्तरबंद सैन्य गाड़ियाँ दूर जा रही हैं। जिस जमीन पर तंबू गड़े थे, उसे समतल कर दिया गया है।
29अक्टूबर तक प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद
खबरों के अनुसार, मंगलवार, 29अक्टूबर तक विवादास्पद क्षेत्रों में सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। सैनिक अपनी पुरानी चौकियों पर लौटेंगे। यह वे चौकियाँ हैं जहाँ वे 2020में गतिरोध शुरू होने से पहले तैनात थे। इस समझौते के तहत सीमा पर बनाए गए कंक्रीट के ब्लॉक्स को नष्ट करना शामिल है। साथ ही, उस भूमि को पहले जैसी स्थिति में लाना होगा। भारत और चीन दोनों के पास देपसांग और डेमचोक में निगरानी के विकल्प बने रहेंगे। सैनिक गश्त पर जाने से पहले एक-दूसरे को सूचित करेंगे। इससे किसी भी गफलत से बचा जा सकेगा।
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