IAS Officer Pension After Retirement : अक्सर लोगों के मन में उलझन रहती है कि क्या देश के सभी आईएएस अफसरों को रिटायरमेंट के बाद एक जैसी पेंशन मिलती है या इसमें भी पोस्ट के हिसाब से कोई छोटा-बड़ा होता है. इसके साथ ही, जो अफसर अपनी मर्जी से नौकरी के बीच में वीआरएस (VRS) यानी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले लेते हैं, उनकी पेंशन का क्या होता है? सरकारी नियमों और 7वें वेतन आयोग के आधार पर इन सभी सवालों के जवाब बेहद दिलचस्प हैं. जानिए आईएएस अफसर की रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी और उनकी पेंशन का पूरा गणित क्या है।
जानें कितनी मिलती है पेंशन?
IAS अफसर की पेंशन का सीधा कनेक्शन उनकी आखिरी सैलरी से होता है. सातवें वेतन आयोग के नियमों के मुताबिक, रिटायरमेंट के समय अफसर की जो बेसिक सैलरी होती है, उसका ठीक 50 फीसदी हिस्सा उन्हें हर महीने पेंशन के रूप में दिया जाता है. मिसाल के तौर पर, अगर कोई IAS अफसर ‘कैबिनेट सेक्रेटरी’ (जो कि देश में आईएएस का सबसे ऊंचा पद है) के पद से रिटायर होता है तो उनकी बेसिक सैलरी लगभग 2.5 लाख रुपये महीना होती है।
इस लिहाज से उन्हें हर महीने कम से कम 1.25 लाख रुपये की पेंशन मिलती है. इस पेंशन पर समय-समय पर बढ़ने वाला महंगाई भत्ता (DA) भी अलग से जोड़ा जाता है.
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क्या सभी IAS की पेंशन बराबर होती है?
इसका सीधा जवाब है- नहीं, सबको बराबर पेंशन नहीं मिलती. हर आईएएस अफसर की पेंशन उनके रिटायरमेंट के समय के पद, उनकी कुल सर्विस के साल और उनकी आखिरी बेसिक सैलरी के आधार पर अलग-अलग तय होती है. जो अफसर सिर्फ 30-32 साल की उम्र में सर्विस में आया और जो 22-23 साल की उम्र में ही अफसर बन गया था, दोनों के प्रमोशन के स्तर और आखिरी सैलरी में फर्क आ जाता है. मुख्य सचिव या कैबिनेट सचिव के पद से रिटायर होने वाले अफसर की पेंशन, जूनियर या मध्यम स्तर के पदों से रिटायर होने वाले अफसरों के मुकाबले काफी ज्यादा होती है.
VRS लेने वालों को पेंशन मिलती है या नहीं?
कई आईएएस अफसर निजी कारणों या पॉलिटिक्स में जाने के लिए अपनी मर्जी से समय से पहले ही रिटायरमेंट ले लेते हैं, जिसे वीआरएस (Voluntary Retirement Scheme) कहा जाता है. सरकारी नियमों के मुताबिक, अगर किसी आईएएस अफसर ने कम से कम 20 साल की रेगुलर सर्विस पूरी कर ली है तो वह वीआरएस लेने के बाद भी पूरी पेंशन का हकदार होता है. लेकिन अगर कोई अफसर 20 साल की नौकरी पूरी होने से पहले ही इस्तीफा दे देता है तो उसे पेंशन का लाभ नहीं मिलता. हालांकि, 20 साल बाद वीआरएस लेने पर भी पेंशन का फॉर्मूला वही रहता है- यानी अंतिम बेसिक सैलरी का 50 प्रतिशत.
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पेंशन के अलावा भी मिलती हैं ये बड़ी सुविधाएं
रिटायरमेंट के बाद सरकार सिर्फ नकद पेंशन ही नहीं देती, बल्कि पूर्व अफसरों के सम्मान और सुरक्षा का पूरा ख्याल रखती है. इन्हें ग्रेच्युटी (Gratuity) के रूप में एकमुश्त मोटी रकम मिलती है. इसके अलावा, लाइफटाइम मुफ्त मेडिकल सुविधाएं (CGHS के तहत), लीव एनकैशमेंट (बची हुई छुट्टियों के बदले पैसा) और प्रोविडेंट फंड (PF) का पैसा भी मिलता है. कई सीनियर अफसरों को तो रिटायरमेंट के बाद सरकार अलग-अलग कमीशन या कमेटियों का हेड बनाकर दोबारा नियुक्त कर देती है, जहां उन्हें फिर से पूरी सैलरी और सुविधाएं मिलने लगती हैं.