
TB Cases India 2026:हर साल 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस मनाया जाका है। लेकिन ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है – क्या टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है? तो जवाब है हां! अगर लक्षण दिखते ही जांच हो जाए और डॉक्टर के बताए मुताबिक पूरा इलाज लिया जाए तो टीबी 90 प्रतिशत से ज्यादा मामलों में जड़ से खत्म हो जाती है।
नेशनल टीबी एलिमिनेशन प्रोग्राम (NTEP) के तहत भारत में ड्रग-सेंसिटिव टीबी का सफलता दर 90 प्रतिशत पहुंच चुका है, जो वैश्विक औसत 88 प्रतिशत से बेहतर है। ड्रग-रेजिस्टेंट टीबी के लिए भी नई शॉर्ट-कोर्स दवाएं (जैसे BPaLM रेजिमेन) उपलब्ध हैं, जिनसे 6 महीने में ही 80 प्रतिशत मरीज ठीक हो जाते हैं। WHO Global TB Report 2025 भी यही पुष्टि करता है कि समय पर इलाज से टीबी पूरी तरह नियंत्रित और ठीक हो सकती है।
भारत में टीबी का हाल
WHO की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 2015 से 2024 के बीच भारत में टीबी के नए केस में 21% की कमी आई यानी 237 प्रति लाख से घटकर 187 प्रति लाख हो गई। यह वैश्विक औसत गिरावट (12%) से लगभग दोगुनी रफ्तार है। मृत्यु दर भी 28 प्रति लाख से घटकर 21 प्रति लाख रह गई। ट्रीटमेंट कवरेज 53% से बढ़कर 92% हो गया और 2024 में 26.18 लाख मरीजों का पता चला। भारत अभी भी वैश्विक टीबी बोझ का 25% हिस्सा वहन करता है, लेकिन ‘टीबी मुक्त भारत’ अभियान के तहत प्रगति तेज है।
टीबी के मुख्य संकेत
टीबी मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है, लेकिन शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है। अगर ये लक्षण 2 हफ्ते से ज्यादा रहें तो तुरंत जांच कराएं। बच्चे, बुजुर्ग, डायबिटीज या एचआईवी वाले मरीजों में खतरा ज्यादा होता है। शुरुआत में लक्षण हल्के लगते हैं, लेकिन अनदेखा करने पर फैल सकता है।
• लगातार खांसी (कभी खून भी आए)
• हल्का बुखार, खासकर रात में पसीना
• बिना वजह वजन कम होना
• थकान और कमजोरी
• सीने में दर्द या सांस लेने में तकलीफ
• भूख न लगना
टीबी का इलाज और बचाव
भारत में इलाज पूरी तरह मुफ्त है। सामान्य टीबी का कोर्स 6 महीने का होता है – पहले 2 महीने 4 दवाएं (रिफैम्पिसिन, आइसोनियाजिड, पाइरेजिनामाइड, एथाम्बुटॉल) और अगले 4 महीने 2 दवाएं। MDR/XDR टीबी के लिए BPaLM जैसी नई दवाएं मात्र 6 महीने में ही असरदार साबित हो रही हैं। Ni-kshay पोषण योजना के तहत हर मरीज को हर महीने ₹1000 की सहायता मिलती है। Nikshay पोर्टल पर हर केस की निगरानी होती है।
बचाव के उपाय
• बच्चों को BCG वैक्सीन लगवाएं
• परिवार के संपर्क में आने वालों को प्रिवेंटिव दवा दें
• अच्छा पोषण, स्वच्छता और घर में वेंटिलेशन रखें
• धूम्रपान और शराब से दूर रहें
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