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Haryana News: हरियाणा के सरकारी स्कूलों में टीचरों पर सख्ती, अब क्लासरुम में नहीं ले जा सकेंगे मोबाइल, शिक्षा मंत्री ने दिए आदेश

Haryana News: हरियाणा के सरकारी स्कूलों में टीचरों पर सख्ती, अब क्लासरुम में नहीं ले जा सकेंगे मोबाइल, शिक्षा मंत्री ने दिए आदेश

Haryana News:  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य के स्कूलों में 25 मई से 30 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित करने का निर्णय लिया। बैठक में शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा के सुझावों को स्वीकार करते हुए हरियाणा के सरकारी विद्यालयों के पाठ्यक्रम में श्रमदान को अनिवार्य किए जाने का निर्णय लिया गया। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि विद्यार्थियों में अनुशासन, सहभागिता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सके।

शिक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से शिक्षा मंत्री के सुझाव पर मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शिक्षक कक्षा में मोबाइल फोन लेकर नहीं जाएंगे। शिक्षकों के मोबाइल विद्यालय में प्रधानाचार्य कक्ष में जमा रहेंगे तथा शिक्षण कार्य के दौरान मोबाइल के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके। मुख्यमंत्री ने आज चंडीगढ़ में विद्यालय आधारभूत संरचना की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा भी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री उत्कृष्टता एवं प्रारंभिक अंग्रेजी विद्यालयों की शुरुआत

इस अवसर पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शिक्षा क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री उत्कृष्टता एवं प्रारंभिक अंग्रेजी विद्यालयों की शुरुआत की। वर्ष 2026-27 के बजट घोषणा के अनुरूप पहले चरण में चिन्हित 250 विद्यालयों का शुभारंभ किया गया। इन विद्यालयों को प्रधानमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय और आदर्श विद्यालयों की तर्ज पर विकसित किया जाएगा ।

ये विद्यालय हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड से संबद्ध होंगे तथा इनमें हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यमों में शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। विद्यालयों में आधुनिक संसाधन, बेहतर आधारभूत ढांचा, प्रयोगशालाएं, स्मार्ट कक्षाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था विकसित की जाएगी। शिक्षकों और प्रधानाचार्यों का चयन स्क्रीनिंग प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित हो सके।

विद्यालय भवन, आधारभूत संरचना और सुविधाओं को मजबूत करने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने विद्यालय भवनों और आधारभूत संरचना को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण शाखा को एकीकृत किया जाए तथा स्कूल भवनों का डिजाइन एकरूपता और गुणवत्ता के आधार पर तैयार किया जाए, जिससे अव्यवस्थित संरचनाओं से बचा जा सके। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन विद्यालय भवनों को जर्जर अथवा अनुपयोगी घोषित किया गया है, वहां नए भवनों का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। साथ ही विद्यालयों में शौचालय, पेयजल, बागवानी और अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।

मुख्यमंत्री ने खराब एवं अनुपयोगी शौचालयों की शीघ्र मरम्मत तथा नियमित रखरखाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी विद्यालयों की चारदीवारी की मरम्मत को प्राथमिकता से पूरा करने के लिए कहा तथा स्पष्ट किया कि संबंधित कार्यों की गुणवत्ता का निरीक्षण विद्यालय प्रबंधन समिति और प्रधानाचार्य द्वारा किया जाए तथा संतोषजनक रिपोर्ट के बाद ही भुगतान किया जाए।

उन्होंने कहा कि जिन गांवों में प्राथमिक विद्यालय की आवश्यकता है, वहां मांग के अनुसार नए विद्यालय स्थापित किए जाएं। साथ ही विद्यालयों में शिक्षकों एवं अन्य स्टाफ की आवश्यकता को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।

स्मार्ट कक्षाएं, जवाबदेही और शिक्षकों की व्यवस्था पर जोर

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि विद्यालयों में स्मार्ट कक्षाओं को पूरी तरह कार्यशील बनाया जाए तथा जहां तकनीकी अथवा अन्य कारणों से वे संचालित नहीं हो रही हैं, वहां तत्काल सुधार किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों ने विद्यालयों में सूचना प्रौद्योगिकी सुविधाओं को पूर्ण रूप से कार्यशील दर्शाते हुए गलत रिपोर्ट प्रस्तुत की है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति भिन्न पाई गई, उनके विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाए।

उन्होंने कहा कि जिन विद्यालयों में शिक्षकों की कमी अथवा अनुपस्थिति की स्थिति है, वहां स्मार्ट कक्षाओं और द्वि-दिशात्मक प्रणाली के माध्यम से लाइव कक्षाएं संचालित की जाएं। साथ ही जहां शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, वहां शीघ्र नियुक्ति सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नियमित व्यवस्था होने तक सेवा देने के इच्छुक सेवानिवृत्त शिक्षकों की सेवाएं स्वैच्छिक आधार पर ली जा सकती हैं तथा नियमानुसार मानदेय उपलब्ध कराया जा सकता है।

विद्यालयों में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने खेल अवधि को अनिवार्य रूप से प्रभावी ढंग से संचालित करने तथा उसकी समुचित योजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यालय ऐसा वातावरण विकसित करें, जिससे विद्यार्थियों और अभिभावकों को प्रत्येक कक्षा बेहतर सीखने का अनुभव प्रदान करती हुई महसूस हो।

मुख्यमंत्री ने विद्यालय परिसरों में बागवानी और वृक्षारोपण कार्य का सर्वेक्षण करने तथा लगाए गए पौधों के संरक्षण और रखरखाव को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और बेहतर शैक्षणिक परिणामों पर विशेष ध्यान देने को कहा।

विद्यालय प्रबंधन, निरीक्षण और रखरखाव व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश

विद्यालय प्रबंधन समिति की बैठकों को नियमित और पारदर्शी बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रत्येक माह विद्यालय प्रबंधन समिति की बैठक अनिवार्य रूप से आयोजित की जाए। इसके लिए एक त्वरित पोर्टल विकसित किया जाए, जिसमें बैठक का एजेंडा, कार्यवृत्त और समीक्षा संबंधी जानकारी उपलब्ध हो तथा संबंधित अधिकारी नियमित निगरानी करें।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शिक्षा विभाग के अधिकारी नियमित रूप से विद्यालयों का निरीक्षण करें। साथ ही जिला स्तर के प्रथम श्रेणी अधिकारी समय-समय पर विद्यालयों का दौरा कर विद्यार्थियों से संवाद करें, व्यवस्थाओं की समीक्षा करें और अपनी रिपोर्ट पोर्टल पर उपलब्ध कराएं।

बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिन विद्यालयों में सफाई कर्मचारी, चौकीदार अथवा अन्य आवश्यक पद रिक्त हैं, वहां शीघ्र व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि विद्यालयों का संचालन बेहतर ढंग से हो सके। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने निर्णय लिया कि प्राथमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों के रखरखाव एवं आवश्यक सुविधाओं के लिए सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली राशि 36 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये की जाएगी, जिससे विद्यालयों की रखरखाव व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ हो सके।

बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण कुमार गुप्ता, विद्यालय शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव विजय सिंह दहिया, मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव डॉ. यश पाल, माध्यमिक शिक्षा महानिदेशक जितेंद्र दहिया, प्राथमिक शिक्षा निदेशक मनीता मलिक, मुख्यमंत्री के ओएसडी बी.बी. भारती, विवेक कालिया, वीरेन्द्र बढ़खालसा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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