Haryana News: हरियाणा सरकार प्रदेश में जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने को लेकर खासी संजीदा है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने अधिकारियों को प्राकृतिक खेती के लिए उपयुक्त कम से कम पांच फसलों की पहचान कर उनके उत्पादन, प्रोत्साहन एवं विपणन के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस पहल के तहत हल्दी, लाल मिर्च और अदरक जैसी फसलों की संभावनाओं पर भी विचार किया जा सकता है।
रस्तोगी प्रदेश में प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने तथा इसके तहत उत्पादित कृषि उपज के प्रमाणन, खरीद और विपणन के लिए समन्वित व्यवस्था विकसित करने के उद्देश्य से आज यहां एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कार्ययोजना में उपयुक्त कृषि क्षेत्रों, उत्पादन लक्ष्य, किसानों की भागीदारी, प्रमाणन संबंधी आवश्यकताओं तथा विपणन व्यवस्था को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए।
बैठक में प्राकृतिक एवं जैविक खेती करने वाले किसानों को विश्वसनीय खरीद व्यवस्था और संगठित विपणन प्रणाली से जोड़ने के साथ-साथ कृषि उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, उनकी पहचान एवं पता लगाने की व्यवस्था विकसित करने और किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्य सचिव रस्तोगी ने कृषि और बागवानी विभागों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती करने वाले किसानों तथा किसान समूहों का जिला और फसलवार प्रमाणित डाटा तैयार करने के निर्देश भी दिए। इस डाटा में खेती का क्षेत्रफल, प्रमाणन की स्थिति, अनुमानित उत्पादन और बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध संभावित उपज का विवरण शामिल होगा। इससे उपयुक्त फसलों और उत्पादन क्लस्टरों की पहचान करने में मदद मिलेगी। बैठक में हरियाणा राज्य सहकारी आपूर्ति एवं विपणन प्रसंघ (हैफेड) के प्रबंध निदेशक श्री चंद्रशेखर खरे ने किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने तथा प्रमाणित प्राकृतिक एवं जैविक उत्पादों के प्रति उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ाने के लिए प्रभावी विपणन चैनल विकसित करने में हैफेड की भूमिका पर प्रकाश डाला।
बैठक में प्राकृतिक एवं जैविक उत्पादों के प्रमाणन की व्यवस्था पर भी चर्चा की गई। इसमें हरियाणा राज्य बीज प्रमाणीकरण एजेंसी तथा अन्य मान्यता प्राप्त प्रमाणन संस्थाओं की भूमिका पर विचार किया गया। साथ ही, खेत से लेकर अंतिम उत्पाद तक उपज की गुणवत्ता, जांच, सत्यापन और ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए पारदर्शी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया।
मुख्य सचिव ने किसानों को इस पहल से जोड़ने, उनके प्रशिक्षण, पंजीकरण एवं प्रमाणन तथा किसानों और उनकी उपज का विश्वसनीय रिकॉर्ड तैयार करने के निर्देश भी दिए। इस कार्य में राष्ट्रीय जैविक एवं प्राकृतिक खेती केंद्र, पीजीएस-इंडिया के संबंधित प्रतिनिधियों तथा अन्य मान्यता प्राप्त प्रमाणन संस्थाओं से तकनीकी मार्गदर्शन लेने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
बैठक में सहकारिता विभाग के प्रधान सचिव पंकज यादव, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग की प्रधान सचिव अमनीत पी. कुमार, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के निदेशक अमित खत्री सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।