Haryana news :हरियाणा से बड़ी खबर सामने आई है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग (Higher Education Department) में कार्यरत हजारों अनुबंधित (Contractual) और अस्थायी लेक्चरर्स को एक बहुत बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने नियमितीकरण (Regularization) की मांग वाली याचिकाओं का निपटारा करते हुए राज्य सरकार को 6 महीने के भीतर अंतिम निर्णय लेने का आदेश जारी किया है।
देरी की तो अधिकारियों की जेब से लगेगा 50-50 हजार जुर्माना!
हाई कोर्ट ने इस मामले में बेहद सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ-साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उच्च शिक्षा निदेशक (Director of Higher Education) तय समय सीमा (6 महीने) के भीतर फैसला नहीं लेते हैं, तो जिम्मेदार अधिकारी को प्रत्येक याचिकाकर्ता को ₹50,000 जुर्माने के रूप में देने होंगे। यह जुर्माना सीधा अधिकारी की जवाबदेही तय करेगा।
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किन-किन विषयों के शिक्षकों को मिलेगा फायदा?
यह राहत किसी एक विषय के लिए नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा विभाग में कार्यरत विभिन्न विषयों के अध्यापकों के लिए है, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
* कंप्यूटर साइंस (Computer Science)
* कॉमर्स (Commerce)
* मैनेजमेंट (Management)
* और अन्य विभिन्न विषयों के कार्यरत हजारों अस्थायी लेक्चरर्स।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत होगा फैसला
सुनवाई के दौरान सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि यदि याचिकाकर्ता 4 सप्ताह के भीतर अपना प्रतिनिधित्व (Representation) विभाग के सामने सौंपते हैं, तो विभाग *सुप्रीम कोर्ट के 16 अप्रैल 2026 के ऐतिहासिक फैसले* और राज्य के मौजूदा नियमों को ध्यान में रखते हुए कारण सहित (Reasoned Order) आदेश पारित करेगा। कोर्ट ने सरकार के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले को निपटा दिया है।
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क्यों अहम है यह फैसला?
हरियाणा में लंबे समय से कच्चे और अनुबंधित कर्मचारी पक्के होने (Regularization) की राह देख रहे हैं। हाई कोर्ट का यह कड़ा रुख और समय सीमा तय करना लेक्चरर्स के सुरक्षित भविष्य और राज्य सरकार की नियमितीकरण नीति (Regularization Policy) के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।