Haryana News: हरियाणा में बाल मजदूरी के दौरान रेस्क्यू किए गए बच्चों और अनाथ आश्रमों में रह रहे बच्चों के लिए बाल संरक्षण आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। अब इन बच्चों को अकेलेपन का एहसास न हो, इसके लिए उनके जन्मदिन पर बाल संरक्षण आयोग की ओर से समारोह आयोजित किया जाएगा। बच्चों से केक कटवाया जाएगा और उनके खाने-पीने का भी इंतजाम आयोग की ओर से किया जाएगा।
यह घोषणा बाल संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन तृप्ति श्योरान ने भिवानी के अनाथ आश्रम में बच्चों के साथ अपना जन्मदिन मनाने के दौरान की। इसके साथ ही प्रदेश के हर जिले में सीसीआई यानी चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूट खोलने की योजना पर भी बड़ा फैसला लिया गया है। बाल संरक्षण आयोग ने प्रदेश के बच्चों के हित में दो महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। पहला फैसला हर जिले में चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूट खोलने को लेकर है। चेयरपर्सन तृप्ति श्योरान ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के सामने इस संबंध में प्रस्ताव रखा था, जिस पर सहमति बन गई है। फिलहाल प्रदेश के कुछ ही जिलों में चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूट की सुविधा उपलब्ध है। ऐसे में बाल मजदूरी या अन्य परिस्थितियों में रेस्क्यू किए गए बच्चों को कई बार दूसरे जिले के सीसीआई में भेजना पड़ता है। हर जिले में सीसीआई बनने के बाद बच्चों को उनके ही जिले में सुरक्षित रखने और उनकी देखभाल करने में आसानी होगी।
वहीं, ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता नहीं हैं या उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है, उन्हें भी चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूट में रखा जा सकेगा। इन बच्चों की देखभाल और परवरिश की जिम्मेदारी बाल संरक्षण व्यवस्था के तहत सुनिश्चित की जाएगी। दूसरे फैसले के तहत अब बाल संरक्षण आयोग उन बच्चों का जन्मदिन भी मनाएगा, जो अनाथ आश्रमों या बाल संरक्षण आयोग की निगरानी में रह रहे हैं। तृप्ति श्योरान ने भिवानी के अनाथ आश्रम में बच्चों के बीच अपना जन्मदिन मनाते हुए कहा कि आयोग के पास इन बच्चों के जन्मदिन की पूरी सूची रहेगी। हर बच्चे के जन्मदिन पर आयोग की ओर से एक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस समारोह में बच्चे केक काटेंगे और उनके लिए खाने-पीने की व्यवस्था भी की जाएगी। इतना ही नहीं, आयोग की ओर से एक सदस्य भी बच्चे के जन्मदिन के कार्यक्रम में शामिल होगा।
बाल संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन की इस घोषणा के बाद अनाथ आश्रम में रह रहे बच्चों में खासा उत्साह और खुशी देखने को मिली। आयोग का कहना है कि इन प्रयासों का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षा के साथ-साथ अपनापन और खुशी का माहौल देना है।