Haryana News: हरियाणा का इतिहास गौरवशाली और समृद्ध रहा है। राज्य के लगभग हर जिले की अपनी अलग पहचान और ऐतिहासिक महत्व है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हरियाणा के किस जिले को 'सोने का शहर' या 'गोल्डन सिटी' कहा जाता है? पौराणिक मान्यताओं और ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार, यह गौरव सोनीपत जिले को प्राप्त है।
स्वर्णप्रस्थ से सोनीपत तक का सफर
सोनीपत को 'सोने का शहर' कहे जाने के पीछे सबसे बड़ा कारण इसका प्राचीन नाम 'स्वर्णप्रस्थ' माना जाता है। 'स्वर्णप्रस्थ' शब्द दो भागों से मिलकर बना है, 'स्वर्ण' अर्थात सोना और 'प्रस्थ' अर्थात नगर या स्थान। इस प्रकार स्वर्णप्रस्थ का अर्थ 'सोने का शहर' हुआ ।
महाभारत काल से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान श्रीकृष्ण पांडवों की ओर से शांति प्रस्ताव लेकर राजा धृतराष्ट्र के दरबार में पहुंचे थे, तब पांडवों ने पूरे राज्य के बदले केवल पांच गांवों की मांग की थी। इन पांच गांवों में स्वर्णप्रस्थ (वर्तमान सोनीपत) भी शामिल था।
महाभारत के पांच प्रसिद्ध 'प्रस्थ'
पौराणिक कथाओं के अनुसार, पांडवों द्वारा मांगे गए पांच गांव थे। जिनमें स्वर्णप्रस्थ (सोनीपत), पानप्रस्थ (पानीपत), सोनप्रस्थ (बागपत), तिलप्रस्थ (तिलपत), इंद्रप्रस्थ (दिल्ली) शामिल थे।
समय के साथ स्वर्णप्रस्थ का नाम बदलकर सोनप्रस्थ, फिर सोणपत और अंततः सोनीपत हो गया।
आधुनिक दौर में भी बरकरार है 'गोल्डन सिटी' की पहचान
सोनीपत केवल पौराणिक महत्व के कारण ही नहीं, बल्कि आधुनिक विकास के कारण भी हरियाणा के प्रमुख जिलों में गिना जाता है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का हिस्सा होने के कारण यहां उद्योग, व्यापार और निवेश तेजी से बढ़ा है।
इसके अलावा, राजीव गांधी एजुकेशन सिटी जैसे बड़े शैक्षणिक केंद्रों ने सोनीपत को शिक्षा के क्षेत्र में भी नई पहचान दिलाई है।