Gaurav Gogoi Statement: कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने मंगलवार को 2024 की राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (अंडरग्रेजुएट) (NEET-UG) के प्रश्नपत्र लीक मामले में सरकार के रवैये पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में आरोपित 45 आरोपियों में से 44 को जमानत मिल चुकी है। इसके अलावा गोगोई ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाया और आरोप लगाया कि इस कानून के बावजूद 2026 में एक और प्रश्नपत्र लीक की घटना घटी।
संसद में क्या बोले गौरव गोगोई?
लोकसभा में विपक्ष की ओर से विधेयक पर चर्चा शुरू करते हुए गोगोई ने कहा ‘अब मैं सदन के समक्ष 2024 के NEET-UG परीक्षा पेपर लीक मामले की जांच की वर्तमान स्थिति प्रस्तुत करना चाहता हूं। ताकि देश यह समझ सके कि दो साल पहले NEET परीक्षा में हुए व्यापक भ्रष्टाचार को लेकर यह सरकार कितनी गंभीर है। मुझे बड़े खेद के साथ यह बताना पड़ रहा है कि 2026 में प्रकाशित एक लेख में कहा गया था कि NEET-UG परीक्षा पेपर लीक मामले में जिन 45 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया था, उनमें से 44 को जमानत मिल चुकी है। यही सरकार की गंभीरता है।‘
गोगोई ने NEET-UG परीक्षा पेपर लीक होने से इनकार करने वाले पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बयान की भी आलोचना की। उन्होंने कहा ‘क्योंकि 2024 में यह कानून लाने के बावजूद, 2026 में फिर से पेपर लीक हो गया। अगर कानून इतना मजबूत था, तो सिर्फ दो साल बाद इतनी बड़ी मात्रा में पेपर लीक कैसे हो गया? दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि तब भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान थे। जब 2024 का पेपर लीक राष्ट्रीय मुद्दा बन गया, तो क्या आप जानते हैं कि धर्मेंद्र प्रधान ने क्या कहा? उन्होंने कहा, 'पेपर कहां लीक हुआ? कोई पेपर लीक नहीं हुआ है।‘
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किरेन रिजिजू ने क्या कहा?
इससे पहले, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार जरूरत पड़ने पर लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा को 10 घंटे तक बढ़ाने के लिए तैयार है। रिजिजू ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके और एनसीपी सहित विभिन्न दलों के नेताओं से बात की है और वे निर्धारित छह घंटे की चर्चा को दो घंटे बढ़ाने पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने कहा ‘मैंने सभी दलों के नेताओं, कांग्रेस के मुख्य सचेतक, समाजवादी पार्टी के मुख्य सचेतक, डीएमके और एनसीपी के नेताओं से बात की और सभी छह घंटे की चर्चा को दो घंटे बढ़ाकर आठ घंटे करने पर सहमत हुए। हम सभी इस समझौते पर पहुंचे।‘
तो वहीं, केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक पर बहस शुरू करते हुए कहा कि ये संशोधन 2024 के विधेयक में किए जा रहे हैं, जो स्वतंत्र भारत में छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए अपनी तरह का पहला विधेयक था और जिसे वर्तमान सरकार ने ही पेश किया था।
क्या कहता है 2024 का विधेयक?
बता दें, संशोधन विधेयक सार्वजनिक परीक्षाओं (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के प्रावधानों को और मजबूत करने का प्रयास करता है, जिसमें त्वरित जांच, विशेष त्वरित न्यायालयों के माध्यम से शीघ्र सुनवाई, विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति, अपीलों का समयबद्ध निपटान और अधिक कठोर दंडात्मक प्रावधान शामिल हैं, ताकि सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों और संगठित कदाचार को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।
विधेयक अनुचित साधनों का सहारा लेने वाले व्यक्तियों के लिए सजा को बढ़ाने का प्रस्ताव करता है, जिसमें कारावास की अवधि को कम से कम पांच साल तक बढ़ाया जाएगा, जिसे दस साल तक बढ़ाया जा सकता है, जबकि वर्तमान में कारावास की अवधि कम से कम पांच साल है। तीन साल से अधिक की सजा को पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है। अधिकतम जुर्माने को भी 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है।