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Asha Bhosle Demise: समय रहते हो जाएं अलर्ट! बढ़ रहा कार्डियक अरेस्ट का खतरा, जानें इसके लक्षण और बचाव के तरीके

Asha Bhosle Demise: समय रहते हो जाएं अलर्ट! बढ़ रहा कार्डियक अरेस्ट का खतरा, जानें इसके लक्षण और बचाव के तरीके

Cardiac Arrest Prevention: भारतीय सिनेमा की अनमोल आवाज आशा भोसले (92) का आज मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया। उन्होंने कार्डियक अरेस्ट और फेफड़ों की समस्या के कारण अंतिम सांस ली। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, शनिवार शाम उन्हें थकान और छाती के संक्रमण के कारण भर्ती कराया गया था, जहां उनकी हालत बिगड़ने के बाद कार्डियक अरेस्ट आया और मल्टी-ऑर्गन फेलियर से उनका निधन हो गया। 

बता दें, आशा भोसले की पोती जनाई भोसले ने पहले सोशल मीडिया पर जानकारी दी थी कि दादी को अत्यधिक थकान और छाती के संक्रमण की वजह से अस्पताल ले जाना पड़ा। परिवार ने गोपनीयता का सम्मान करने की अपील की थी। दिग्गज गायिका के निधन से संगीत जगत और पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। ऐसे में चलिए कार्डियक अरेस्ट के बारे में जानते है, जिसकी वजह से आशा भोसले का निधन हुआ। 

कार्डियक अरेस्ट क्या है

कार्डियक अरेस्ट एक गंभीर चिकित्सकीय आपात स्थिति है, जिसमें दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है। इससे दिमाग और अन्य अंगों को खून नहीं पहुंच पाता। हालांकि, यह हार्ट अटैक से अलग है। हार्ट अटैक में धमनियों में ब्लॉकेज होता है, जबकि कार्डियक अरेस्ट में दिल की विद्युतीय गतिविधि बिगड़ जाती है। 

Also read: Asha Bhosle Demise: कम उम्र में शादी...दर्द और संघर्ष से भरी रही Asha Bhosle की जिंदगी, फिर भी बनीं संगीत की दिग्गज

कार्डियक अरेस्ट के मुख्य लक्षण 

1. सीने में दर्द: दबाव, जकड़न या हल्का दर्द (हमेशा तेज दर्द नहीं होता)।

2. सांस लेने में तकलीफ: अचानक हांफना या सांस फूलना।

3. अत्यधिक थकान या कमजोरी: बिना किसी वजह के थकान महसूस होना, जो सामान्य से ज्यादा हो।

4. चक्कर आना या बेहोशी

5. जी मिचलाना या उल्टी: पेट की समस्या जैसा महसूस होना।

6. जबड़ेगर्दनपीठ या बांहों में दर्द: सीने के अलावा इन जगहों पर असुविधा।

7. ठंडा पसीना या चिंता का अचानक बढ़ना। 

कब हो जाएं सतर्क?

1. अगर अचानक सीने में असुविधा, सांस फूलना या बेहोशी जैसा महसूस हो तो तुरंत 108 या नजदीकी अस्पताल संपर्क करें।

2. अगर व्यक्ति होश में नहीं है, सांस नहीं ले रहा या नाड़ी नहीं चल रही तो CPR (कार्डियो-पल्मोनरी रिससिटेशन) शुरू करें और डिफिब्रिलेटर की व्यवस्था करें।

3. जोखिम कारक: उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, धूम्रपान, परिवार में हृदय रोग का इतिहास या पहले से छाती का संक्रमण। बुजुर्गों में फेफड़ों की समस्या कार्डियक अरेस्ट को ट्रिगर कर सकती है। 

बचाव के उपाय

1. नियमित स्वास्थ्य जांच: ब्लड प्रेशर, शुगर, कोलेस्ट्रॉल और ईसीजी करवाएं।

2. स्वस्थ जीवनशैली: संतुलित आहार, हल्का व्यायाम, तनाव प्रबंधन और पर्याप्त नींद।

3. संक्रमण से बचाव: सर्दी-खांसी या छाती के संक्रमण को नजरअंदाज न करें, खासकर बुजुर्गों में।

4. दवाइयां समय पर लें और डॉक्टर की सलाह मानें।

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