Hindu Calendar Adhik Maas: हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 (विक्रम संवत 2083) में अधिक मास या पुरुषोत्तम मास (मल मास) लग रहा है। इस बार यह ज्येष्ठ मास में पड़ेगा, जिससे साल में दो ज्येष्ठ महीने हो जाएंगे और पूरे हिंदू वर्ष में 13 महीने हो जाएंगे। पंचांग के मुताबिक, अधिक मास 2026 की शुरुआत 17 मई 2026 (रविवार) को ज्येष्ठ शुक्ल प्रतिपदा से होगी और यह 15 जून 2026 (सोमवार) को समाप्त होगा। इस दौरान लगभग 30 दिनों का यह अतिरिक्त महीना सूर्य और चंद्रमा के गति के अंतर को संतुलित करने के लिए जुड़ता है।
अधिक मास का महत्व
अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है क्योंकि भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) ने इसे अपना नाम दिया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस मास में की गई भक्ति, पूजा, दान और व्रत का फल हजार गुना बढ़ जाता है। इसे मल मास भी कहते हैं क्योंकि इसे कुछ लोग अशुभ मानते हैं, लेकिन वास्तव में यह आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस महीने में शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि टाले जाते हैं, लेकिन भक्ति और सदाचार के कार्यों को विशेष महत्व दिया जाता है।
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अधिक मास में क्या करना चाहिए?
1. भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण की पूजा: रोजाना विष्णु सहस्रनाम का पाठ, श्रीमद् भागवत कथा सुनना या पढ़ना बेहद लाभदायक है।
2. व्रत और उपवास: शक्ति अनुसार एक समय भोजन, नक्त भोजन (रात में एक बार) या फलाहार व्रत रखें।
3. दान-पुण्य: ब्राह्मणों, गरीबों को अन्न, वस्त्र, दीपक, जल या फल दान करें। दान का विशेष फल मिलता है।
4. जप और ध्यान: हरि नाम जप, गायत्री मंत्र या गुरु मंत्र का जाप करें। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान-ध्यान करें।
5. तीर्थ यात्रा या परिक्रमा: अगर संभव हो तो मंदिरों में दर्शन, व्रिंदावन-मथुरा या अन्य तीर्थ स्थलों की यात्रा करें।
6. सात्विक जीवन: सात्विक भोजन लें, कम बोलें, क्रोध और निंदा से बचें।
अधिक मास में क्या नहीं करना चाहिए?
1. शुभ मुहूर्त वाले कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय शुरू करना, मुंडन, गृह निर्माण आदि टालें।
2. अनावश्यक विवाद, झूठ, निंदा या दूसरों को हानि पहुंचाने वाले कार्यों से बचें।
3. मांसाहार, मद्यपान और तामसिक भोजन से दूर रहें।
4. इस मास को अशुभ मानकर पूजा-पाठ या दान छोड़ने की गलती न करें।