
Delhi Drainage System: देश की राजधानी दिल्ली में मानसून दस्तक दे चुका है। लेकिन इसके साथ ही मानसून ने राजधानी की जल निकासी व्यवस्था की कमियों को एक बार फिर उजागर किया है। दरअसल, बीते दिन इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट के पास नेशनल हाईवे-8 (NH8) के आसपास के इलाके में बारिश हुई। जिस वजह से बारिश के पानी और घरेलू सीवेज को निकालने वाले नाले गायब हो गए हैं। इस समस्या ने ने दिल्ली की मानसून तैयारियों की पोल खोल दी है।
क्या है गायब नालों की कहानी?
बता दें, पिछले दो दशकों में IGI एयरपोर्ट के आसपास हाईवे, मेट्रो और अन्य बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास हुआ है। इस दौरान NH8के किनारे मौजूद नाले, जो पहले बारिश के पानी और घरेलू सीवेज को नजफगढ़ ड्रेन तक ले जाते थे, अब या तो दब गए हैं या पूरी तरह गायब हो गए हैं। हाईवे विस्तार, मेट्रो निर्माण और एयरपोर्ट के इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के दौरान इन नालों को जोड़ने या बचाने की कोई योजना नहीं बनाई गई। जिस वजह से बारिश का पानी और सीवेज अब एयरपोर्ट की आंतरिक जल निकासी प्रणाली में जमा होने लगा है। जिससे सड़कों पर जलभराव और स्वास्थ्य खतरा बढ़ गया हैं।
NHAI को निरीक्षण के बाद दिए नए निर्देश
हाल ही में दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत के नेतृत्व में निरीक्षण किए गए। जिसमें सामने आया कि NH8और महिपालपुर के स्थानीय ड्रेनेज सिस्टम में बारिश के पानी की निकासी के लिए रास्ता नहीं है। जिस वजह से पानी की धाराएं आपस में टकरा रही हैं। इस समस्या को देखते हुए NHAI को NH8की सर्विस रोड के किनारे एक नया स्टॉर्म वॉटर ड्रेन बनाने का आदेश दिया गया है। जो दिल्ली के मुख्य ड्रेनेज नेटवर्क से जुड़ेगा।
इसके अलावा NHAI को गायब हो चुके नालों की लोकेशन का पता लगाने के लिए खुदाई का काम शुरू करने का निर्देश दिया गया। बता दें, हाल ही में हुए निरीक्षण में यह सवाल उठा कि बारिश के पानी और सीवेज की निकासी की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? NHAI, दिल्ली नगर निगम (MCD), दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC), और एयरपोर्ट प्राधिकरण के बीच समन्वय की कमी इस समस्या का प्रमुख कारण मानी जा रही है।
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