Reports On Rice Production:देश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अब विदाई की ओर बढ़ रहा है, लेकिन इस बार बारिश की कमी ने खेती और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से मॉनसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो रही हैं और करीब 19 सितंबर 2026 से इसकी वापसी शुरू होने की संभावना है। सामान्य तौर पर पश्चिमी राजस्थान से मॉनसून की वापसी 17 सितंबर के आसपास शुरू होती है।
मॉनसून सीजन के दौरान 14 सितंबर तक देश में सामान्य के मुकाबले करीब 15 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जहां बारिश सामान्य से 28 फीसदी कम रही। वहीं पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में बारिश की कमी करीब 25 फीसदी दर्ज की गई। केंद्रीय भारत में कमी 6 फीसदी और उत्तर-पश्चिम भारत में 10 फीसदी के आसपास रही। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी के मॉनसून ऑनलाइन के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 14 सितंबर के बीच देश में 673.5 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 790.1 मिमी होती है। यानी बारिश सामान्य से 14.76 फीसदी कम रही।
अल नीनो का दिखा असर
कम बारिश की एक बड़ी वजह इस सीजन में मजबूत होते अल नीनो को माना जा रहा है। बारिश की कमी का सीधा असर खेती पर पड़ा है। खरीफ फसलों की बुआई का रकबा भी पिछले साल की तुलना में कम दर्ज किया गया है। खास तौर पर धान की बुआई में गिरावट चिंता बढ़ाने वाली है। धान देश की प्रमुख खरीफ फसलों में शामिल है। इसकी बुआई के रकबे में कमी का असर आगे चलकर उत्पादन और बाजार में उपलब्धता पर पड़ सकता है। अगर उत्पादन प्रभावित होता है तो आने वाले समय में चावल की कीमतों पर भी दबाव देखने को मिल सकता है।
महंगाई ने बढ़ाई चिंता
खेती पर बारिश की कमी के बीच थोक महंगाई के आंकड़े भी चिंता बढ़ा रहे हैं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार कार्यालय ने अगस्त 2026 के लिए नई WPI सीरीज के तहत आंकड़े जारी किए हैं। सरकार ने WPI की नई सीरीज का आधार वर्ष 2022-23 रखा है और अगस्त 2026 का WPI रिलीज उपलब्ध है। थोक महंगाई में खाद्य सामग्री, खाद्य उत्पादों का विनिर्माण, खनिज तेल एवं पेट्रोलियम उत्पाद, मूलभूत धातुओं का विनिर्माण, गैर-खाद्य पदार्थ और रसायन एवं रासायनिक उत्पादों का विनिर्माण प्रमुख प्रभाव डालने वाले समूह रहे।
किसानों से लेकर आम आदमी तक असर
मॉनसून की कमी का असर सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहता। कम बारिश से फसल उत्पादन प्रभावित होने पर मंडियों में कृषि उत्पादों की आवक घट सकती है। इससे खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। दूसरी ओर, किसानों के लिए कम बारिश सिंचाई लागत और उत्पादन जोखिम बढ़ा सकती है। फिलहाल मॉनसून की वापसी शुरू होने से पहले देश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। ऐसे में आने वाले दिनों की बारिश यह तय करने में अहम होगी कि खरीफ फसलों को कितनी राहत मिलती है और खाद्य कीमतों पर इसका कितना असर पड़ता है।
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