“बुलडोजर से न्याय दिलाना बिल्कुल अस्वीकार्य”, अपने कार्यकाल के आखिरी जजमेंट में बोले CJI डीवाई चंद्रचूड़

“बुलडोजर से न्याय दिलाना बिल्कुल अस्वीकार्य”, अपने कार्यकाल के आखिरी जजमेंट में बोले CJI डीवाई चंद्रचूड़

CJI DY Chandrachud On Bulldozer Action: सुप्रीम कोर्ट में अपने अंतिम फैसले के रूप में भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ ने 'बुलडोजर जस्टिस' की कठोर निंदा की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि कानून के शासन के तहत बुलडोजर से न्याय दिलाना बिल्कुल अस्वीकार्य है। यह निर्णय उन मामलों में एक स्पष्ट दिशा प्रदान करता है, जहां बिना उचित प्रक्रिया का पालन किए लोगों की संपत्ति को ध्वस्त किया जा रहा है। गौरतलब है कि डीवाई चंद्रचूड़ का कार्यकाल 10 नवंबर को रिटायर हो जाएंगे। अब उनके जगह देश के अगले सीजेआई संजय खन्ना पदभार संभालेंगे।

CJI ने दिया अनुच्छेद 300ए का हवाला

सीजेआई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि अगर इसकी अनुमति दे दी गई तो अनुच्छेद 300ए के तहत संपत्ति के अधिकार की संवैधानिक मान्यता समाप्त हो जाएगी। संविधान के अनुच्छेद 300ए में कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को कानून के प्राधिकार के बिना उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के महाराजगंज में हुए बुलडोजर एक्शन पर अपना फैसला सुनाया था। इस दौरान शीर्ष अदालत ने योगी सरकार को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने यूपी सरकार को मुआवजा देने का भी आदेश दिया था।

जिसका घर तोड़ा है उसे दें 25 लाख- CJI

योगी सरकार के बुलडोजर एक्शन पर चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि आप इस तरह लोगों के घरों को कैसे तोड़ना शुरू कर सकते हैं? किसी के घर में घुसना अराजकता है. यह पूरी तरह से मनमानी है। उचित प्रक्रिया का पालन कहां किया गया है? चीफ जस्टिस ने कहा कि हमारे पास हलफनामा है, जिसमें कहा गया है कि कोई नोटिस जारी नहीं किया गया था। आप केवल साइट पर गए थे और लोगों को सूचित किया था। क्या इससे न्याय का उद्देश्य पूरा होगा? चंद्रचूड़ ने कहा कि जिसका घर तोड़ा है उसे 25 लाख रुपए का मुआवजा दे।

 

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