नई दिल्ली: जगत जननी मां दुर्गा की आराधना को समर्पित नवरात्रि साल में दो बार आती है. एक चैत्र नवरात्रि और दूसरा शारदीय नवरात्रि. इस साल चैत्र नवरात्रि की शुरूआत 25 मार्च बुधवार से हो रही है. बता दें कि हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से ही हिन्दू नववर्ष का प्रारंभ होता है. इस बार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी 25 मार्च से विक्रम नवसंत्सवर 2077 का प्रारंभ होगा. इस प्रकार से देखें तो चैत्र नवरात्रि और हिन्दू नव वर्ष का प्रारंभ एक ही दिन हो रहा है.
इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 25 मार्च से प्रारंभ होकर 02 अप्रैल तक रहेगी. 02 अप्रैल को नवमी तिथि होगी. 03 अप्रैल को दशमी के साथ नवरात्रि का पारण होगा. चलिए, जानते हैं कि इस वर्ष नवरात्रि के लिए घट स्थापना या कलश स्थापना किस दिन होगा और किस दिन किस देवी की पूजा की जाएगी.
25 मार्च : बुधवार
25 मार्च नवरात्रि का पहला दिन होगा। इस दिन व्रत रखने वाले लोग शुभ मुहूर्त में घट स्थापना करेंगे और मां शैलपुत्री की पूजा विधि विधान से करेंगे।
26 मार्च : गुरुवार
नवरात्रि के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है.
27 मार्च : शुक्रवार
27 मार्च के दिन मां दुर्गा के गौरी स्वरूप की पूजा की जाएगी. जिससे सभी की मनोकामना पूरी होगी.
28 मार्च : शनिवार
28 मार्च को नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के कुष्मांडा स्वरूप की पूजा होती है.
29 मार्च : रविवार
29 मार्च को नवरात्रि के पांचवे दिन स्कंदमाता की पूजा विधि विधान से की जाएगी.
30 मार्च : सोमवार
नवरात्रि को छठे दिन कात्यायनी माता की पूजा अर्चना की जाएगी.
31 मार्च : मंगलवार
नवरात्रि के सातवें दिन को महा सप्तमी भी कहा जाता है. इस दिन माता कालरात्रि का पूजा की जाएगी.
01 अप्रैल : बुधवार
1 अप्रैल को दुर्गा अष्टमी होगी. आज के दिन महागौरी की विधि विधान से पूरे देश में पूजा की जाती है.
02 अप्रैल: गुरुवार
चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन को मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. हालांकि, चैत्र शुक्ल नवमी के दिन भगवान राम का जन्म हुआ था, इसलिए इस तिथि को राम नवमी के रूप में भी मनाया जाता है.
इतना ही नहीं, नवरात्रि में श्रद्धालु अपने घरों में ही नहीं पूजा करते है. बल्कि, जगत जननी दुर्गा माता के धार्मिक स्थानों पर जाकर भी विधि विधान से पूजा करते है. नवरात्रि में माता के श्रद्धालु वैष्मो देवी मंदिर और शाकुंभरी देवी जाकर भी पूजा करते है.