Bihar News: बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि कृषि विभाग राज्य में पुराने एवं कम उत्पादकता वाले फलदार बागानों के जीर्णोद्धार और उनकी उत्पादकता बढ़ाने के लिए विशेष पहल कर रही है। कृषि विभाग के उद्यान निदेशालय द्वारा संचालित एकीकृत बागवानी विकास योजना के अंतर्गत किसानों को बागानों के कायाकल्प के लिए विभिन्न कार्यों पर 40 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य आम एवं लीची जैसे पुराने फलदार बागानों को वैज्ञानिक तरीके से विकसित करना, पेड़ों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना तथा फल उत्पादन एवं किसानों की आय में वृद्धि करना है।
विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि केन्द्र एवं राज्य की सरकार का विजन है कि वैज्ञानिक तकनीकों और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर खेती को अधिक उत्पादक एवं लाभकारी बनाया जाए तथा किसानों की आय में वृद्धि हो। इसी दिशा में पुराने फलदार बागानों का जीर्णोद्धार एक महत्वपूर्ण पहल है। शाखाओं की वैज्ञानिक कटाई, छत्र प्रबंधन (Canopy Management) और संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन से पुराने पेड़ों की उत्पादक क्षमता को पुनर्जीवित किया जा सकेगा। इससे मौजूदा बागानों का बेहतर उपयोग, फल उत्पादन में वृद्धि और किसानों की आय को मजबूती मिलेगी।
सिन्हा ने कहा कि पुराने फलदार बागानों की उत्पादकता बनाए रखने और बढ़ाने के लिए समय-समय पर उनका वैज्ञानिक प्रबंधन एवं उचित देखभाल आवश्यक है। सूखी एवं अनुपयोगी शाखाओं की कटाई, पेड़ों के छत्र-प्रबंधन तथा संतुलित पोषक तत्वों का उपयोग बागानों के बेहतर विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सरकार इन कार्यों को प्रोत्साहित कर किसानों को पुराने बागानों से भी बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के लिए सहायता उपलब्ध करा रही है।
कृषि मंत्री ने बताया कि योजना के तहत पुराने फलदार पेड़ों की सूखी एवं अनुपयोगी शाखाओं की कटाई तथा छत्र-प्रबंधन के लिए प्रति इकाई 10 हजार रुपये की निर्धारित लागत पर 40 प्रतिशत की दर से 4 हजार रुपये अनुदान दिया जाएगा। वहीं, पोषक तत्व प्रबंधन के लिए प्रति इकाई 40 हजार रुपये की निर्धारित लागत पर 40 प्रतिशत की दर से 16 हजार रुपये की सहायता का प्रावधान किया गया है। सिन्हा ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में यह योजना राज्य के 19 लक्षित जिलों में लागू की जाएगी। इनमें बांका, भागलपुर, भोजपुर, बक्सर, दरभंगा, कटिहार, खगड़िया, मधुबनी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, पश्चिम चंपारण, पटना, पूर्वी चंपारण, पूर्णिया, सहरसा, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, सुपौल एवं वैशाली शामिल हैं।
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि किसानों के पुराने फलदार बागान फिर से उत्पादक बनें और उनकी मेहनत का बेहतर प्रतिफल मिले। वैज्ञानिक तरीके से शाखाओं की कटाई, छत्र-प्रबंधन एवं पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग से पेड़ों की सेहत में सुधार होगा तथा फल उत्पादन की क्षमता बढ़ेगी। इससे न केवल पुराने बागानों का कायाकल्प होगा, बल्कि किसानों की आमदनी बढ़ाने और राज्य में बागवानी क्षेत्र को नई गति देने में भी मदद मिलेगी।