Nepal Crisis: नेपाल में अचानक आई बाढ़ आम जनजीवन को त्रस्त कर दिया है। वहां बाढ़ के कारण लोगों का जिना मुहाल हो गया है। इसी बीच एक भावुक कहानी नेपाल से आई है, जिसने हर किसी भावुक कर दिया।
दरअसल, नुवाकोट के त्रिशूली घाटी के इलाके में 1643 बच्चे मौजूद थे। हालात बिगड़ते देख कुछ ही मिनटों में निर्णय लेना था। हालांकि, प्रिंसिपल ने राजेंद्र दवाड़ी ने बिना देर किए स्कूल खाली करना का फैसला लिया। उनका ये फैसला 1643 बच्चों की जान बचाने वाला साबित हुआ।
शिक्षक ने बचाई बच्चों की जान
बताया जा रहा है कि बुधवार यानी 26 अगस्त को दवाड़ी को एक दोस्त ने फोन किया। उसने बताया कि गांव नदी में बह चुका है और उन्हें तुरंत वहां से निकलने को कहा। दवाड़ी को लगा स्कूल सुरक्षित है लेकिन, कुछ देर बाद ही हालात बदलने लगे। खतरे की आहट मिलते ही दवाड़ी ने बिना देर किए स्कूल की घंटी बजा दी। उन्होंने तुरंत शिक्षकों को क्लासरूम खाली करने को कहा। साथ बस ड्रा्इवरों को फोन कर गाड़ियों को वापस लाने को कहा। जिस पर सवार होकर बच्चे स्कूल से बाहर निकले। बाकी बच्चे पैदल ही ऊपर की ओर दौड़े। कुछ ही मिनटो में बच्चे सुरक्षित स्थान पर पहुंच चुके थे।
अपने दो साथी को नहीं बचा सके
सभी बच्चे ऊंचाई पर लगे एक बोधि पेड़ के नीचे पहुंचकर आराम ही कर रहे थे कि बाढ़ ने स्कूल को अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते पानी की तेज बहाव पूरी इमारत को बहा ले गया। जिस जगह थोड़ी देर पहले बच्चे पढ़ाई कर रहे थे। वहां अब सिर्फ कीचड़, मलबा और पानी का खौफनाक मंजर देखने को मिला। दवाड़ी के समय रहते लिए गए फैसले ने 1643 बच्चों का जीवन बचा लिया लेकिन, अफसोस वह अपने दो साथियों को इस त्रासदी की भेंट चढ़ने से नहीं रोक सके।
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