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सिक्किम और भूटान जल्द जुड़ेंगे भारतीय रेल से, चीन की बढ़ सकती है टेंशन

सिक्किम और भूटान जल्द जुड़ेंगे भारतीय रेल से, चीन की बढ़ सकती है टेंशन

Indian Railways: भारत अपने पूर्वोत्तर और सीमावर्ती इलाकों में रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। सिक्किम और पड़ोसी देश भूटान जल्द ही भारतीय रेल के नेटवर्क से जुड़ सकते हैं। सरकार ने सिक्किम में 2027 और भूटान में 2029 तक ट्रेन सेवा शुरू करने का लक्ष्य रखा है। इन परियोजनाओं को रणनीतिक नजरिए से भी काफी अहम माना जा रहा है।

भूटान के लिए 69 किमी लंबी रेल लाइन

भारत और भूटान को जोड़ने के लिए 69 किलोमीटर लंबी कोकराझार-गेलेफू रेललाइन बनाई जा रही है। इस परियोजना पर केंद्र सरकार करीब 3,500 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। सरकार ने इसे विशेष रेल परियोजना का दर्जा दिया है। इसका मकसद भूमि अधिग्रहण, वन मंजूरी और दूसरी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा करना है। यह रेललाइन भूटान के गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी को भारतीय रेल नेटवर्क से जोड़ेगी। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और लोगों की आवाजाही आसान होने की उम्मीद है।

चीन के लिए क्यों अहम है परियोजना? 

सिक्किम और भूटान से जुड़ी इन रेल परियोजनाओं का रणनीतिक महत्व भी काफी ज्यादा है। दोनों क्षेत्र चीन की सीमा के करीब हैं। ऐसे में बेहतर रेल कनेक्टिविटी से भारतीय सेना को सीमा तक पहुंचने में मदद मिलेगी। खराब मौसम और भूस्खलन के कारण सड़क मार्ग प्रभावित होने की स्थिति में रेल सेवा एक मजबूत विकल्प बन सकती है। नई रेल लाइनों से सैन्य सामान, जरूरी उपकरण और जवानों को सीमावर्ती इलाकों तक पहुंचाने में लगने वाला समय कम हो सकता है। इससे भारत की सीमा पर लॉजिस्टिक्स क्षमता और मजबूत होगी।

सिक्किम में सेवक-रंगपो रेल परियोजना

सिक्किम को पहली बार ब्रॉडगेज रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए सेवक-रंगपो रेल परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। करीब 44.96 किलोमीटर लंबी इस रेललाइन का बड़ा हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरता है। लगभग 86 से 90 प्रतिशत मार्ग सुरंगों में बनाया जा रहा है।

तीस्ता नदी के नीचे बनेगा स्टेशन

इस परियोजना का सबसे खास हिस्सा तीस्ता बाजार रेलवे स्टेशन है, जिसे तीस्ता नदी के नीचे भूमिगत बनाया जा रहा है। इसे देश का पहला पूरी तरह अंडरग्राउंड रेलवे स्टेशन बताया जा रहा है। करीब 12,450 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में सुरक्षा परीक्षण और ट्रेन सेवा दिसंबर 2027 तक शुरू करने का लक्ष्य है। इन रेल परियोजनाओं से पूर्वोत्तर में पर्यटन, व्यापार और आम लोगों की आवाजाही को बढ़ावा मिलने के साथ भारत की सीमावर्ती कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी।

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