Thare Vaaste Re Dhola Song: बॉलीवुड के पुराने गानों का जादू आज भी संगीत प्रेमियों के सिर चढ़कर बोलता है। 80 और 90 के दशक के कई ऐसे गीत हैं, जिन्हें आज भी लोग उतने ही प्यार से सुनते हैं, जितना रिलीज के समय सुनते थे। ऐसा ही एक यादगार गाना फिल्म ‘बटवारा’ का ‘थारे वास्ते रे ढोला’ है। साल 1989 में रिलीज हुआ यह गीत अपनी मधुर धुन, राजस्थानी अंदाज और तीन मशहूर गायिकाओं अलका याग्निक, अनुराधा पौडवाल और कविता कृष्णमूर्ति की शानदार आवाजों के लिए आज भी याद किया जाता है।
एक गाने में सुनाई दीं तीन दिग्गज गायिकाओं की आवाजें
80 के दशक के अंतिम वर्षों और 90 के दशक की शुरुआत में हिंदी फिल्म संगीत तेजी से बदल रहा था। इस दौर में लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसी दिग्गज गायिकाओं के साथ अलका याग्निक, अनुराधा पौडवाल और कविता कृष्णमूर्ति भी संगीत की दुनिया में अपनी मजबूत पहचान बना रही थीं।
तीनों गायिकाओं के बीच प्रोफेशनल प्रतिस्पर्धा की चर्चाएं अक्सर होती थीं, लेकिन संगीत के प्रति उनका जुनून कई यादगार गीतों में दिखाई दिया। फिल्म ‘बटवारा’ का ‘थारे वास्ते रे ढोला’ ऐसा ही एक गीत है, जिसमें तीनों की आवाजों का खूबसूरत संगम सुनने को मिलता है।
इस गीत को अलका याग्निक, अनुराधा पौडवाल और कविता कृष्णमूर्ति ने अपनी आवाज दी थी। इसके बोल हसन कमाल ने लिखे थे, जबकि संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी ने तैयार किया था।
डिंपल कपाड़िया, अमृता सिंह और पूनम ढिल्लों पर फिल्माया गया था गाना
फिल्म ‘बटवारा’ का यह गीत अपनी गायकी के साथ-साथ शानदार फिल्मांकन के लिए भी खास रहा। गाने में डिंपल कपाड़िया, अमृता सिंह और पूनम ढिल्लों नजर आई थीं। तीनों अभिनेत्रियों पर फिल्माए गए इस गीत में राजस्थानी संस्कृति की खूबसूरत झलक देखने को मिलती है।
पारंपरिक राजस्थानी परिधान, रेगिस्तान का दृश्य और लोक संगीत से मिलती-जुलती धुन ने इस गाने को एक अलग पहचान दी। फिल्म में धर्मेंद्र और विनोद खन्ना जैसे दिग्गज अभिनेता भी अहम भूमिकाओं में नजर आए थे।
37 साल बाद भी सोशल मीडिया पर चर्चा में है ‘थारे वास्ते रे ढोला’
आज के डिजिटल दौर में पुराने बॉलीवुड गानों की लोकप्रियता एक बार फिर बढ़ रही है। इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब शॉर्ट्स और सोशल मीडिया के दूसरे प्लेटफॉर्म पर पुराने गानों को नए अंदाज में पेश किया जा रहा है।
इसी बीच फिल्म ‘बटवारा’ का ‘थारे वास्ते रे ढोला’ भी संगीत प्रेमियों के बीच चर्चा में बना हुआ है। हाल ही में अनुराधा पौडवाल द्वारा अलका याग्निक के साथ अपने प्रोफेशनल मुकाबले को लेकर दिए गए इंटरव्यू के बाद इस गीत की चर्चा फिर तेज हुई।
करीब 37 साल बाद भी यह गाना अपनी सुरीली आवाजों, शानदार संगीत और राजस्थानी रंग के कारण लोगों के दिलों में खास जगह बनाए हुए है। यह गीत उस दौर की याद दिलाता है, जब बॉलीवुड संगीत में मधुर धुनों और बेहतरीन गायकी का अलग ही जादू हुआ करता था।