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हिंदी में MBBS का प्रयोग क्यों नहीं चला? करोड़ों खर्च, किताबें छपीं, फिर भी छात्रों ने अंग्रेजी को चुना

हिंदी में MBBS का प्रयोग क्यों नहीं चला? करोड़ों खर्च, किताबें छपीं, फिर भी छात्रों ने अंग्रेजी को चुना

Medical Education in Hindi: हिंदी दिवस के कुछ दिन बाद मध्य प्रदेश में हिंदी माध्यम से MBBS की पढ़ाई को लेकर बहस तेज हो गई है। साल 2022 में शुरू हुई इस पहल का उद्देश्य मेडिकल शिक्षा को हिंदी में उपलब्ध कराना था। इसके लिए बड़ी संख्या में मेडिकल किताबों का हिंदी में अनुवाद कराया गया और करीब 300 डॉक्टरों की टीम ने इस काम में योगदान दिया। करीब 50 हजार किताबें भी छापी गईं।

प्रयोग को लेकर उठ रहे  सवाल

लेकिन तीन साल बाद इस प्रयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, मेडिकल परीक्षाओं में छात्रों ने हिंदी में उत्तर लिखने में ज्यादा रुचि नहीं दिखाई। ऐसे में सवाल है कि आखिर हिंदी में MBBS का मॉडल उम्मीद के मुताबिक क्यों नहीं चल पाया? इसकी एक बड़ी वजह मेडिकल शिक्षा की भाषा और शब्दावली को माना जा रहा है। Anatomy, Physiology और दूसरे मेडिकल विषयों में पहले से ही कई कठिन तकनीकी शब्द होते हैं। अगर इन शब्दों का बहुत कठिन हिंदी में अनुवाद कर दिया जाए तो छात्रों के लिए विषय समझना और मुश्किल हो सकता है।

छात्रों ने अग्रेजी को चुना

खासकर सरकारी स्कूलों से पढ़कर मेडिकल कॉलेज पहुंचने वाले छात्रों के लिए हिंदी में पढ़ाई मददगार हो सकती है, लेकिन वे यह भी जानते हैं कि आगे MD, MS और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं में अंग्रेजी का इस्तेमाल जारी रहेगा। विदेशों में मेडिकल लाइसेंस परीक्षाओं के लिए भी अंग्रेजी जरूरी होती है। हालांकि मध्य प्रदेश के रतलाम मेडिकल कॉलेज का अनुभव इस तस्वीर का दूसरा पहलू दिखाता है। यहां बड़ी संख्या में छात्रों ने हिंदी की किताबों का इस्तेमाल किया। कॉलेज प्रशासन ने इन किताबों को अंग्रेजी का विकल्प बनाने के बजाय विषय समझने के लिए रेफरेंस मैटेरियल के तौर पर इस्तेमाल करने पर जोर दिया।

हिंदी मेडिकल शिक्षा  को कैसे बना सकती है मजबूत

यही मॉडल हिंदी में मेडिकल शिक्षा के लिए आगे का रास्ता दिखा सकता है। जरूरत केवल किताबों का अनुवाद करने की नहीं, बल्कि छात्रों को उनकी भाषा में विषय समझाने की है। मेडिकल टर्म्स अंग्रेजी में रहें और शिक्षक हिंदी या स्थानीय भाषा में उन्हें आसान तरीके से समझाएं। मातृभाषा में मेडिकल शिक्षा का विचार गलत नहीं है, लेकिन इसे अचानक लागू करने के बजाय धीरे-धीरे और छात्रों की जरूरत के हिसाब से आगे बढ़ाना जरूरी है। तभी हिंदी मेडिकल शिक्षा की मजबूत भाषा बन सकती है।

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इंजीनियरिंग करने का सपना देखने वाले उन छात्रों के लिए राहत की खबर है, जिन्हें अंग्रेजी भाषा के कारण पढ़ाई में परेशानी होती है। मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित प्रतिष्ठित श्री जीएस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस ने हिंदी माध्यम से बीटेक सिविल इंजीनियरिंग कराने का फैसला किया है।

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