Gen Z Workplace: एक समय नौकरी में प्रमोशन को करियर की बड़ी सफलता माना जाता था। पद बढ़ने के साथ जिम्मेदारियां बढ़ना भी उपलब्धि का हिस्सा समझा जाता था। लेकिन अब नई पीढ़ी यानी Gen-Z के बीच प्रमोशन को लेकर सोच बदलती नजर आ रही है। कई युवा कर्मचारी ज्यादा बड़ा पद और मैनेजर की जिम्मेदारी लेने के बजाय अच्छी सैलरी, कम दबाव और बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस को प्राथमिकता दे रहे हैं।
प्रमोशन चाहिए, लेकिन ज्यादा दबाव नहीं
Gen-Z मेहनत करने और अपने काम का क्रेडिट लेने से पीछे नहीं हटती। हालांकि, प्रमोशन के साथ अगर काम के घंटे, जिम्मेदारियां और तनाव तेजी से बढ़ने लगें तो कई युवा इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका मानना है कि करियर में आगे बढ़ने का मतलब हर हाल में बॉस या मैनेजर बनना नहीं है। युवा कर्मचारी चाहते हैं कि उन्हें अपनी पसंद और क्षमता के अनुसार काम करने की आजादी मिले। वे नौकरी के साथ अपनी निजी जिंदगी और समय को भी महत्व दे रहे हैं।
चीन में दिख रहा ‘Conscious Unbossing’ ट्रेंड
इस बदलती सोच का एक उदाहरण चीन में देखने को मिल रहा है। यहां कई युवा कर्मचारी जानबूझकर प्रमोशन लेने से मना कर रहे हैं। इस ट्रेंड को ‘Conscious Unbossing’ कहा जा रहा है। इसका मतलब है मैनेजर या बॉस बनने की दौड़ से खुद पीछे हटना। इन कर्मचारियों का मानना है कि प्रमोशन के बाद टीम संभालने, ज्यादा घंटे काम करने और लगातार उपलब्ध रहने का दबाव बढ़ जाता है। इसलिए वे बड़े पद के बजाय बेहतर सैलरी, अपनी स्किल्स पर काम करने और निजी जिंदगी के लिए ज्यादा समय को महत्व दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर प्रमोशन ठुकराने के लिए बॉस को क्या जवाब देना चाहिए, इसकी स्क्रिप्ट भी शेयर की जा रही हैं।
रिसर्च में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
2025 में Robert Walters की एक रिसर्च में Gen-Z की इस सोच को लेकर कई आंकड़े सामने आए। रिपोर्ट के मुताबिक, 54 फीसदी Gen-Z प्रोफेशनल्स ने कहा कि वे अपने करियर में मैनेजर नहीं बनना चाहते। वहीं, 71 फीसदी लोग दूसरों को मैनेज करने के बजाय अपने करियर और स्किल्स पर फोकस करना पसंद करते हैं। रिसर्च में 65 फीसदी Gen-Z ने मिडिल मैनेजमेंट की नौकरी को ज्यादा तनाव और कम फायदे वाला बताया। हालांकि, 89 फीसदी नियोक्ता अब भी मानते हैं कि कंपनियों के लिए मिडिल मैनेजर जरूरी हैं।
सफलता का मतलब बदल रहा है
Gen-Z के लिए सफलता सिर्फ बड़ा पद या शानदार जॉब टाइटल नहीं है। वे चाहते हैं कि अच्छी कमाई के साथ मानसिक शांति, काम में लचीलापन और निजी जिंदगी के लिए पर्याप्त समय भी मिले। यानी अब सवाल सिर्फ ‘अगला प्रमोशन कब मिलेगा?’ नहीं रह गया है। Gen-Z का सवाल है- ‘क्या मुझे वाकई यह प्रमोशन चाहिए?’ यही सोच आने वाले समय में कंपनियों के काम करने के तरीके और लीडरशिप की भूमिका को भी बदल सकती है।
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