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क्या है संचार साथी ऐप, जिसे ला रही सरकार; कैसे करता है काम, जानें सभी सवालों के जवाब

क्या है संचार साथी ऐप, जिसे ला रही सरकार; कैसे करता है काम, जानें सभी सवालों के जवाब

Know About Sanchar Sathi APP: मंगलवार यानी एक दिसंबर को अचानक से संचार साथी ऐप की चर्चा होने लगी है। चर्चा इस वजह से कि केंद्र सरकार ने मोबाइल फोन में संचार साथी ऐप को इंस्टाल करना अनिवार्य कर दिया है। सरकार ने आदेश दिया है कि मार्च 2026 से बेचे जाने वाल नए फोन में संचार साथी ऐप प्री-इंस्टाल करना होगा। इसको लेकर विपक्ष ने मोर्चा खोल दिया है।

अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि आखिरकार ये संचार साथी ऐप है क्या? ये कैसे काम करता है? अचानक सरकार ने इसे इंस्टाल करना क्यों अनिवार्य कर दिया और विपक्ष क्यों कर रहा है विरोध? चलिए जानते हैं सभी सवालों के जवाब?

क्या है संचार साथी ऐप

संचार साथी ऐप एक साइबर सिक्योरिटी टूल है। यह ऐप 17 जनवरी 2025 को लॉन्च किया गया था। ये ऐप एंड्रॉयड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म पर मौजूद है। दावा किया गया है कि 37 लाख से अधिक चोरी या खोए हुए मोबाइल हैंडसेट को सफलतापूर्वक ब्लॉक किया गया है। साथ ही 22 लाख 76 हजार से अधिक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को खोजा गया है। सरकार की तरफ से यह जानकारी दी गई है कि अगस्त 2025 तक यह ऐप 50 लाख से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है।

कैसे काम करता है संचार साथी

संचार साथी ऐप सीधे सरकार की टेलिकॉम सिक्योरिटी प्रणाली से जुड़ा हुआ है। दरअसल, सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर यानी सीईआईआर केंद्रीय डेटाबेस, जहां देश के हर मोबाइल का IMEI नंबर दर्ज रहता है। जब ग्राहक इस ऐप को फोन में खोलते हैं, तो सबसे पहले यह मोबाइल नंबर मांगता है। नंबर डालने के बाद फोन पर एक ओटीपी आता है, जिसे डालने के बाद फोन इस ऐप से जुड़ जाता है। इसके बाद फोन के IMEI नंबर को पहचान लेता है। ऐप IMEI को दूरसंचार विभाग की केंद्रीय CEIR प्रणाली से मिलाता है और यह जांचता है कि फोन की शिकायत चोरी के मामले में दर्ज तो नहीं है या फिर ये ब्लैकलिस्टेड तो नहीं है।

विपक्ष क्यों कर रहा विरोध

विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने दूरसंचार विभाग के इन निर्देश पर मोदी सरकार को घेरा है। कांग्रेस ने इस कदम को असंवैधानिक बताते हुए इन दिशा-निर्देशों को तत्काल वापस करने की मांग की है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि निजता का अधिकार संविधान में दिया गया मूलभूत अधिकार है और ये दिशा-निर्देश इसकी अवहेलना करता है। उन्होंने कहा कि संविधान की धारा 21 के तहत जीवन और स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का अभिन्न अंग है। 

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