UTU Paper Leak: उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (UTU), देहरादून ने पेपर लीक के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए वर्तमान सेमेस्टर की दो परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। जांच में सामने आया कि एक बाहरी पेपर सेटर ने परीक्षा से पहले ही छात्रों को सवाल भेज दिए थे। इस फैसले से विश्वविद्यालय से जुड़े 12 कॉलेजों के छात्र प्रभावित होंगे। विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. वी.के. पटेल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, "मशीन लर्निंग फॉर इंटरनेट ऑफ थिंग्स" विषय की परीक्षा को लेकर शिकायत मिली थी। जांच में पता चला कि पेपर तैयार करने वाले बाहरी शिक्षक ने परीक्षा से पहले कॉलेज के आंतरिक पोर्टल और व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से वही सवाल छात्रों तक पहुंचा दिए, जो बाद में परीक्षा में पूछे गए।
इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड थ्योरी का प्रश्नपत्र लीक की आशंका
जांच के दौरान यह भी पता चला कि उसी शिक्षक द्वारा तैयार किया गया "इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड थ्योरी" का प्रश्नपत्र भी लीक होने की आशंका है। इसके बाद विश्वविद्यालय ने दोनों परीक्षाएं रद्द करने का फैसला लिया। विश्वविद्यालय ने घोषणा की है कि दोनों विषयों की परीक्षाएं अगस्त 2026 के तीसरे सप्ताह में दोबारा कराई जाएंगी। सभी संबद्ध कॉलेजों को निर्देश दिया गया है कि वे छात्रों को इस फैसले की तुरंत जानकारी दें, ताकि वे दोबारा परीक्षा की तैयारी कर सकें।
सात वर्षों तक लगी रोक
पेपर लीक मामले में विश्वविद्यालय ने संबंधित शिक्षक पर अगले सात वर्षों तक विश्वविद्यालय की किसी भी परीक्षा से जुड़ा काम करने पर रोक लगा दी है। वहीं जिस कॉलेज में वह कार्यरत थे, वहां से भी उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। कॉलेज प्रबंधन के अनुसार, उन्हें 8 जुलाई को इस मामले की शिकायत मिली थी। इसके बाद जांच समिति बनाई गई, जिसने 13 जुलाई को अपनी रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट के आधार पर पहले शिक्षक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई और बाद में विश्वविद्यालय की जांच में दोषी पाए जाने के बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया।
50 सवाल छात्रों के साथ साझा
कॉलेज के निदेशक डॉ. टी.एस. सिद्धू ने बताया कि आरोपी शिक्षक ने व्हाट्सएप ग्रुप में करीब 50 सवाल छात्रों के साथ साझा किए थे। यही सवाल बाद में परीक्षा में पूछे गए। विश्वविद्यालय ने इस मामले में संबंधित कॉलेज को भी चेतावनी दी है और कहा है कि परीक्षा प्रक्रिया में पर्याप्त निगरानी नहीं रखी गई। अब इस मामले की आगे जांच की जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि कड़े कानूनों और सख्त नियमों के बावजूद परीक्षा के प्रश्न पत्र छात्रों तक कैसे पहुंच रहे हैं।
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