Uttarakhand News: उत्तराखंड के ऋषिकेश में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी "जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार" (सेवा पखवाड़ा) कार्यक्रम के द्वितीय चरण के तहत आयोजित 'सेवा सप्ताह' के उद्घाटन समारोह में शामिल होने पहुंचे। साथ ही उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि, "समय का चक्र कितनी तेजी से घूम जाता है इसका एहसास आज मुझे आप सभी के समक्ष यहां पर खड़े होकर हो रहा है। आज देखते ही देखते इस जिम्मेदारी पर आए हुए हमारी सरकार के पांच वर्ष पूरे हो गए।
सीएम धामी ने कहा कि लोग मुझसे पूछते हैं कि आपको पांच वर्ष पूरे होने पर कैसा महसूस हो रहा है? आज मैं इस मंच से कहना चाहता हूं कि मैंने इन पांच वर्षों में कभी कोई दिन, महीना या वर्षों की भी गिनती करने का प्रयास नहीं किया। जब मुझे प्रदेश के मुख्य सेवक के रूप में जिम्मेदारी मिली तो मेरे मन में एक ही संकल्प था कि भगवान बद्री विशाल, बाबा केदार, देवभूमि उत्तराखंड की देवतुल्य जनता और प्रधानमंत्री व हमारे नेतृत्व ने मुझ पर विश्वास करते हुए जो जिम्मेदारी मुझे सौंपी है, उसका निर्वहन मुझे बिना रुके, बिना थके पूरी निष्ठा के साथ निरंतर कार्य करते हुए करना है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, "आज मैं आपके बीच में बतौर मुख्यमंत्री नहीं बल्कि उत्तराखंड के एक सेवक के रूप में उपस्थित हुआ हूं। आज का दिन मेरे लिए कई अर्थों में बहुत विशेष है। आज से ठीक 5 वर्ष पूर्व मुझे राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में देवभूमि उत्तराखंड की सेवा करने का ये सौभाग्य मिला था। आज उस सेवा यात्रा का पांच वर्ष का कालखंड पूरा हो रहा है। मैं प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त करता हूं कि उनके मार्गदर्शन में हमने अनेक ऐसी स्थितियों का सामना किया जो हमें अव्यवस्थित करती थीं। साथ ही मैं आज उत्तराखंड की हमारी देवतुल्य जनता को भी सादर नमन करता हूं जिसने मुझे हर कदम पर अपार स्नेह, आशीर्वाद और भरपूर विश्वास दिया। आप सभी के इसी विश्वास ने मुझे प्रदेश की सेवा करने के लिए नई ऊर्जा प्रदान की है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, "मुझे इस बात का बिल्कुल भी अहंकार नहीं है कि मैं इस दायित्व पर पांच साल पूरे कर रहा हूं। मेरे जीवन की संतुष्टि इस बात में नहीं है कि मैं कितने साल मुख्यमंत्री रहा। मुझे वास्तविक संतुष्टि उस दिन मिलेगी, जब उत्तराखंड के आखिरी छोर पर खड़े अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुँचेगी। जब तक उत्तराखण्ड के हर गरीब के चेहरे पर मुस्कान नहीं आएगी, तब तक आपका यह बेटा, आपका यह भाई चैन से नहीं बैठेगा।