UPI MDR Rule:यूपीआई मर्चेंट पेमेंट का मामला सुप्रीम कोर्ट पहु्ंच गया है। 2000 रुपए से ऊपर के मर्चेंट पेमेंट पर एमडीआर लागू होने के बाद इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है।
एडवोकेट अंजन दत्ता की तरफ दायर की गई याचिका में इस संबंध में 14 दिसंबर की जारी अधिसूचना और 15 सितंबर को जारी किए गए नियम को रद्द करने की मांग की गई है। उनका कहना है कि सरकार का ये कदम असंवैधानिक और गलत है।
क्या है एमडीआर नियम
दरअसल, केंद्र सरकारी की तरफ जारी की गई अधिसूचना के अनुसार, पर्सन टू पर्सन पेमेंट करने पर कई चार्ज नहीं देना होगा। चाहे भुगतान की रकम कितनी भी बड़ी क्यों ना हो। जैसे अगर आप अपने दोस्त, मकान मालिक या रिश्तेदार को पैसा भजेत हैं, तो कई चार्ज नहीं लगेगा। लेकिन, पर्सन टू मर्चेंट पेमेंट पर भुगतान करने पर एमडीआर लगेगा। ये एमडीआर आम नागरिक से नहीं बल्कि मर्चेंट से वसूला जाएगा। यानी पेमेंट रिसीव करने वाले दुकानदार या व्यापारी को एमडीआर देना होगा। वो भी 2000 से ऊपर के भुगतान पर एमडीआर लागू होगा। यानी की साफ है कि एमडीआर लागू होने से आम आदमी की जेब पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है।
राहुल गांधी का सरकार पर निशाना
राहुल गांधी ने कहा कि एमडीआर भले ही 5 फीसदी ट्रांजैक्शंस पर लागू होगा लेकिन यूपीआई के कुल ट्राजैक्शन वैल्यू का लगभग 65 फीसदी है। उन्होंने कहा कि सरकार कहती है कि ग्राहक से कोई फीस नहीं ली जाएगी लेकिन, सवाल उठता है कि दुकानदार पर लगने वाली ये फीस आएगी कहां से? कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से वसूली जाएगी। इससे पहले भी राहुल गांधी ने इसी मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा था। उन्होंने कहा कि था कि मोदी सरकार ने चुपचाप यूपीआई पर फीस लगाने का रास्ता कैसे खोल दिया है। अब 2000 रुपए से ऊपर के भुगतान पर एमडीआर लगाया जा सकता है।
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