UP News: यूपी के गाजीपुर में 35 साल पुराने पुलिस मारपीट के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट संजय कुमार लाल की अदालत ने चार रिटायर्ड पुलिसकर्मियों को दोषी करार देते हुए तीन-तीन साल की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक दोषी पर एक लाख छह हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। दोषसिद्धि के बाद चारों को जिला जेल भेज दिया गया।पूरा मामला वर्ष 1991 का है। 14 अप्रैल को राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक कुबेरनाथ सिंह के साथ तत्कालीन मरदह थाने की पुलिस द्वारा कथित मारपीट कर घायल करने का आरोप लगा था।
आरोप यह भी था कि घटना के बाद शिक्षक के खिलाफ दो मुकदमे दर्ज किए गए, जिन्हें बाद में सीबीसीआईडी की जांच में गलत पाया गया। मामले में वर्ष 1993 में अपराध संख्या 132/1993 के तहत तत्कालीन थानाध्यक्ष एम.ए. काजी समेत पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। सीबीसीआईडी की विवेचना के बाद न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल हुआ।
इस मामले में पहले भी दोषसिद्धि हो चुकी थी, जिसके खिलाफ अभियुक्तों की ओर से अपील की गई थी। अपील पर सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट की अदालत ने चार अभियुक्तों—एसआई सुदमा यादव, कांस्टेबल धर्मदेव तिवारी, कांस्टेबल भीम सिंह और कांस्टेबल ईश नारायण लाल को दोषी करार दिया।
तीन-तीन साल की हुई सजा
अदालत ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गाजीपुर के 1 फरवरी 2025 के निर्णय की पुष्टि करते हुए चारों को तीन-तीन साल की सजा और एक लाख छह हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया। दोषसिद्धि के बाद चारों अभियुक्तों को जिला जेल गाजीपुर भेज दिया गया।