Senior Citizen Act: पुडुचेरी के कराईकल जिले में एक महिला आईएएस अधिकारी ने बुजुर्गों की उपेक्षा करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए तीन बेटों को जेल भेजने का आदेश दिया है। यह मामला 84 वर्षीय बुजुर्ग मुनुसामी से जुड़ा है, जिन्होंने शिकायत की थी कि उनके बेटे पिछले 71 महीनों से उनका भरण-पोषण नहीं कर रहे हैं। कराईकल में सब कलेक्टर (राजस्व) और सब डिवीजन मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात आईएएस अधिकारी एम. पूजा ने मामले की सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। उन्होंने आदेश दिया कि जब तक बेटे अपने पिता को बकाया भरण-पोषण राशि का भुगतान नहीं करते, तब तक उन्हें जेल में रहना होगा।
बेटों ने बुजुर्ग पिता को छोड़ दिया था
यह मामला कराईकल के कोटुचेरी क्षेत्र का है। शिकायत के अनुसार, बुजुर्ग पिता को उनके बेटों ने अपने हाल पर छोड़ दिया था और लंबे समय से उनकी आर्थिक सहायता नहीं की जा रही थी। इसके बाद मुनुसामी ने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत न्याय की मांग की। आईएएस पूजा ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि बुजुर्गों की देखभाल करना संतानों की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया तो जेल की सजा जारी रहेगी।
IAS पूजा लिया फैसला
सीनियर सिटीजन एक्ट 2007 का उद्देश्य बुजुर्गों को आर्थिक सुरक्षा, सम्मानजनक जीवन और कानूनी संरक्षण प्रदान करना है। इस कानून के तहत 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के नागरिक अपने वयस्क बच्चों या कानूनी उत्तराधिकारियों से भरण-पोषण की मांग कर सकते हैं। एम. पूजा AGMUT कैडर की 2023 बैच की आईएएस अधिकारी हैं और मूल रूप से कर्नाटक की रहने वाली हैं। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं टेलीकॉम इंजीनियरिंग में बीई की पढ़ाई की है। पिछले वर्ष जुलाई में उन्हें कराईकल के सब कलेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उनके इस सख्त फैसले की पूरे जिले में चर्चा हो रही है। लोगों का मानना है कि यह आदेश उन लोगों के लिए कड़ा संदेश है जो अपने बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लेते हैं।
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