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SYL नहर पर बैठक खत्म
केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक
पंजाब के सीएम भी डिजिटल माध्यम से जुड़े
दिल्ली: मंगलवार को दिल्ली में हुई SYL नहर को लेकर अहम बैठक खत्म हो गई है. बैठक केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत की अध्यक्षता में हुई. सीएम मनोहर लाल बैठक में मौजूद रहे और पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े. बता दे कि दिल्ली में हुई बैठक में अभी विवाद का पटाक्षेप नहीं हुआ है. बैठक के बाद केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि अगले दौर की बैठक जल्द की जाएगी. दूसरे दौर की बैठक का समय अभी तय नहीं है.
SYL Dispute चलिए, अब आपको बता है कि SYL विवाद क्या है...
हरियाणा पंजाब का SYL नहर का विवाद काफी पुराना है. पंजाब पुनर्गठन अधिनियम के अन्तर्गत 1 नवंबर 1966 को हरियाणा अलग राज्य बना. दोनों राज्यों के अलग होने पर पानी का बंटवारा नहीं हुआ. पानी को लेकर विवाद शुरू हो गया. विवाद खत्म करने के लिए केंद्र ने अधिसूचना जारी करके हरियाणा को 3.5 एमएएफ पानी आवंटित कर दिया. इसी पानी को लाने के लिए 212 किमी लंबी एसवाइएल नहर बनाने का निर्णय हुआ था. हरियाणा ने अपने हिस्से की 91 किमी नहर का निर्माण वर्षों पूर्व पूरा कर दिया था, लेकिन पंजाब ने अब तक विवाद चला आ रहा है. जिसका पटाक्षेप दोनों राज्यों के बीच आज तक नहीं हुआ है. आज तक बैठकों का दौर चल रहा है.
SYL नहर विवाद के प्रमुख घटनाक्रम
19 सितंबर 1960
भारत और पाकिस्तान के बीच विभाजन पूर्व रावी और ब्यास के अतिरिक्त पानी को 1955 के अनुबंध द्वारा आवंटित किया गया. पंजाब को 7.20 एमएएफ (पेप्सू के लिए 1.30 एमएएफ सहित), राजस्थान को 8.00 एमएएफ और जम्मू-कश्मीर को 0.65 एमएएफ पानी आवंटित किया गया था.
24 मार्च 1976
केंद्र ने अधिसूचना जारी करके पहली बार हरियाणा के लिए 3.5 एमएएफ पानी की मात्रा तय की.
13 दिसंबर 1981
साल 1981 को नया अनुबंध हुआ. पंजाब को 4.22, हरियाणा को 3.50, राजस्थान को 8.60, दिल्ली को 0.20 एमएएफ व जम्मू-कश्मीर के लिए 0.65 एमएएफ पानी की मात्रा तय की गई.
8 अप्रैल 1982
इंदिरा गांधी ने पटियाला के कपूरी गांव के पास नहर खुदाई के काम का उद्घघाटन किया. विरोध के कारण पंजाब के हालात बिगड़ गए.
24 जुलाई 1985
साल 1985 में राजीव-लौंगोवाल समझौता हुआ. पंजाब ने नहर बनाने की सहमति दी.
साल 1996
समझौता सिरे नहीं चढ़ने पर हरियाणा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की.जिस पर आज तक याचिका पर याचिका दर्ज होती है.
15 जनवरी 2002
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब को एक वर्ष में एसवाईएल बनाने का निर्देश दिया.
4 जून 2004
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पंजाब की याचिका खारिज हुई
साल 2004 में टर्मिनेट ऑफ एग्रीमेंट एक्ट तैयार हुआ
पंजाब ने पंजाब टर्मिनेशन आफ एग्रीमेंट एक्ट-2004 बनाकर तमाम जल समझौते रद कर दिए. संघीय ढांचे की अवधारण पर चोट पहुंचने का डर देखकर राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट से रेफरेंस मांगा. 12 वर्ष ठंडे बस्ते में रहा.
8 मार्च साल 2016
8 मार्च को दूसरी सुनवाई. अब भी मामला सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के पास है लेकिन, पंजाब सरकार बिना कानून के डर के जमीन लौटाने का एलान कर चुकी है. अब यह नया मामला भी सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है.
18 अगस्त 2020
दोनों राज्यों के सीएम के बीच बैठक हुई. जिसका कोई हल नहीं निकला. जिसमें केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री भी मौजूद रहे.
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