Success Story: बिहार के जहानाबाद जिले के रहने वाले विकास कुमार ने अपनी मेहनत और हौसले से यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी मुश्किल सफलता की राह नहीं रोक सकती। दोनों पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद विकास ने BPSC 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा (CCE) में 116वीं रैंक हासिल की है। इस सफलता के बाद उन्हें ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) का पद मिलेगा। विकास कुमार जहानाबाद जिले के डेरहसैया गांव के रहने वाले हैं। बचपन से ही वह शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं और चलने-फिरने के लिए व्हीलचेयर का सहारा लेते हैं। इसके बावजूद उन्होंने कभी अपनी परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उनका लक्ष्य हमेशा बड़ा था और उसी दिशा में उन्होंने लगातार मेहनत की।
सरकारी स्कूल में हुई शुरुआती पढ़ाई
विकास की शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने कड़ी मेहनत के दम पर आईआईटी धनबाद से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई खत्म होने के बाद उन्हें नौकरी भी मिल गई, लेकिन उनकी जिंदगी का सपना कुछ और था। उनकी मां, जो पेशे से शिक्षिका थीं, चाहती थीं कि उनका बेटा सिविल सेवा में जाए। मां के निधन के बाद विकास ने उनकी अंतिम इच्छा को अपना लक्ष्य बना लिया। उन्होंने नौकरी छोड़ दी और पूरी लगन के साथ BPSC परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।
बेहद अहम रहा पिता का योगदान
इस सफर में उनके पिता का योगदान भी बेहद अहम रहा। जब विकास स्कूल और कॉलेज जाते थे, तब उनके पिता उन्हें साइकिल पर बैठाकर रोज पढ़ने के लिए ले जाते थे। हर कदम पर उन्होंने बेटे का हौसला बढ़ाया और कभी हार मानने नहीं दी। सिविल सेवा की तैयारी के दौरान विकास को कई कठिनाइयों और असफलताओं का सामना करना पड़ा। शारीरिक चुनौतियों के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षा का दबाव भी था, लेकिन उन्होंने अपने आत्मविश्वास को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। लगातार मेहनत, धैर्य और मजबूत इरादों के दम पर उन्होंने आखिरकार BPSC 70वीं परीक्षा में 116वीं रैंक हासिल कर अपने सपने को सच कर दिखाया।
लाखों युवाओं के लिए बनी प्रेरणा
आज विकास कुमार की सफलता लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि सफलता पाने के लिए सबसे जरूरी चीज मजबूत इरादे, लगातार मेहनत और परिवार का साथ है। शारीरिक चुनौतियां किसी व्यक्ति की मंजिल तय नहीं करतीं, बल्कि उसका हौसला और मेहनत ही उसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाती है।
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