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Success Story: 6 बार BPSC में असफल हुईं दिव्या भारती, हार नहीं मानी और बनीं SDM

Success Story: 6 बार BPSC में असफल हुईं दिव्या भारती, हार नहीं मानी और बनीं SDM

Success Story: बिहार की दिव्या भारती की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो बार-बार असफल होने के बाद अपने सपनों को छोड़ने की सोचने लगते हैं। ग्रामीण परिवेश से आने वाली दिव्या ने सामाजिक चुनौतियों, आर्थिक सीमाओं और लगातार मिली असफलताओं का डटकर सामना किया। आखिरकार उन्होंने 6 बार असफल होने के बाद BPSC परीक्षा पास कर SDM बनने का सपना पूरा कर लिया। दिव्या भारती का बचपन बिहार के एक गांव में बीता। उनके पिता किसान हैं। परिवार और आसपास के माहौल में बेटियों की पढ़ाई को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता था। इसी वजह से उनके भाई का दाखिला इंग्लिश मीडियम स्कूल में कराया गया, जबकि दिव्या को हिंदी मीडियम में पढ़ाया गया। पढ़ाई में अच्छी होने के बावजूद वह परिवार के फैसले के खिलाफ कुछ नहीं कह सकीं।

10वीं में रुक गई थी  पढ़ाई

दिव्या बताती हैं कि 10वीं में कम अंक आने के बाद उनकी पढ़ाई लगभग रुक गई थी। परिवार का मानना था कि लड़कियों का जीवन शादी और घर संभालने तक ही सीमित होता है। इस सोच के कारण उन्हें मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने पिता से आगे पढ़ने की अनुमति मांगी। 12वीं कक्षा में दिव्या ने पूरी मेहनत से पढ़ाई की और अच्छे अंक हासिल किए। इसके बाद उनके पिता ने उन्हें आगे की पढ़ाई की इजाजत दी। उन्होंने ग्रेजुएशन पूरा किया और परिवार को बताया कि वह बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की तैयारी करना चाहती हैं। साल 2017 में वह पटना पहुंचीं और सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। इस दौरान उन्हें स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी।

गातार असफलताओं का किया सामना 

BPSC की तैयारी के दौरान दिव्या को लगातार असफलताओं का सामना करना पड़ा। वह 6 बार परीक्षा में सफल नहीं हो सकीं। कई बार इंटरव्यू तक पहुंचने के बाद भी चयन नहीं हुआ। बार-बार मिली नाकामी ने उन्हें निराश जरूर किया, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने BPSC की 70वीं परीक्षा में 532वीं रैंक हासिल कर सफलता प्राप्त की। अब वह SDM बन चुकी हैं। उनकी सफलता ने न केवल उनके परिवार की सोच बदली, बल्कि समाज को भी यह संदेश दिया कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करसकती हैं।

रोज 16 घंटे पढ़ना जरूरी

दिव्या भारती का कहना है कि सफलता के लिए रोज 16 घंटे पढ़ना जरूरी नहीं है। अगर छात्र रोजाना 4 से 5 घंटे पूरी ईमानदारी और लगातार पढ़ाई करें, समय का सही प्रबंधन करें और रोज उत्तर लेखन का अभ्यास करें, तो सफलता जरूर मिल सकती है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि मेहनत, धैर्य और लगातार प्रयास करने वालों के सपने एक दिन जरूर पूरे होते हैं।

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