UPSC Success Story: कड़ी मेहनत, मजबूत इरादे और परिवार के सहयोग से कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है। इसका जीता-जागता उदाहरण हैं दिव्या, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद यूपीएससी परीक्षा पास कर आईएएस अधिकारी बनने का सपना पूरा किया। उनकी सफलता आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। दिव्या बताती हैं कि जब वह केवल आठ-नौ साल की थीं, तभी उनके पिता का निधन हो गया था। इसके बाद उनकी मां ने अकेले ही तीन बच्चों की परवरिश की। बचपन में अपने स्कूल में एक एसडीएम को देखकर दिव्या ने तय कर लिया था कि वह भी अधिकारी बनेंगी, ताकि उनकी मां को भी वही सम्मान मिले जो एक अफसर की मां को मिलता है।
बिना किसी कोचिंग के की पढ़ाई
उन्होंने बताया कि कॉलेज में पहुंचने के बाद उन्हें यूपीएससी परीक्षा के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट से परीक्षा का पूरा सिलेबस और पैटर्न देखा। बिना किसी कोचिंग और मार्गदर्शन के उन्होंने घर के एक छोटे से कमरे में तैयारी शुरू कर दी। दिव्या के पास न लैपटॉप था, न स्मार्टफोन और न ही वाई-फाई की सुविधा। उन्होंने गूगल, यूट्यूब और सफल उम्मीदवारों के इंटरव्यू देखकर तैयारी की रणनीति बनाई। टॉपर्स की सलाह पर एनसीईआरटी और अन्य जरूरी किताबों से पढ़ाई की।
पांचवीं तक की गांव में पढ़ाई
उन्होंने बताया कि पांचवीं तक गांव के स्कूल में पढ़ाई की। इसके बाद उनका चयन नवोदय विद्यालय में हो गया। बारहवीं के बाद उन्होंने सरकारी पीजी कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए वह गांव के एक स्कूल में बच्चों को पढ़ाती थीं और घर पर भी ट्यूशन लेती थीं। दिव्या का पहला प्रयास वर्ष 2021 की यूपीएससी परीक्षा था। इसमें उन्होंने 438वीं रैंक हासिल की और उनका चयन आईपीएस के लिए हुआ। उन्हें मणिपुर कैडर मिला। लेकिन उनका सपना आईएएस बनने का था, इसलिए उन्होंने हार नहीं मानी और तैयारी जारी रखी।
105वीं रैंक किया हासिल
दूसरे प्रयास में वर्ष 2022 की यूपीएससी परीक्षा में उन्होंने 105वीं रैंक हासिल कर आईएएस बनने का सपना पूरा कर लिया। दिव्या अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां, भाई-बहन और लगातार की गई मेहनत को देती हैं। उनका कहना है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह नहीं रोक सकते।
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