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Purnima 2026: वैशाख पूर्णिमा व्रत की सही तिथि क्या है? यहां जानें इस दिन का महत्व, शुभ मुहूर्त और पारण की विधि

Purnima 2026: वैशाख पूर्णिमा व्रत की सही तिथि क्या है? यहां जानें इस दिन का महत्व, शुभ मुहूर्त और पारण की विधि

Vaishakh Purnima Vrat 2026: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि को बेहद शुभ दिन माना जाता है। साल 2026 में वैशाख मास की पूर्णिमा (जिसे बुद्ध पूर्णिमा भी कहते हैं) 01 मई शुक्रवार को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि 30 अप्रैल 2026 की रात 9:12 बजे शुरू होकर 1 मई की रात 10:52 बजे तक रहेगी। चंद्रोदय का समय लगभग शाम 6:52 बजे होगा। इस दिन बुद्ध पूर्णिमा और कूर्म जयंती का संयोग बन रहा है, जो इसे और भी विशेष बना देता है।

बुद्ध पूर्णिमा की व्रत विधि

1. सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र नदी या गंगाजल मिले जल) से स्नान कर के साफ-सुथरे कपड़े पहनें।

2. इसके बाद पूजा स्थल पर भगवान विष्णु या इष्ट देव के सामने व्रत का संकल्प लें।

3. संकल्प लेने के साथ ही आपका व्रत शुरु हो जाएगा, जिसके बाद पूरे दिन अन्न ग्रहण नहीं करना।

4. सत्यनारायण पूजा या विष्णु पूजा करें। इस दौरान फूल, धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें।

5. शाम को चंद्रमा उदय होने पर दूध, शक्कर और चावल मिलाकर 'ॐ सोम सोमाय नमः' मंत्र का जाप करते हुए जल अर्घ्य दें।

6. पूजा पूरी होने के बाद ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र या दक्षिणा दें।

7. इसके बाद अगले दिन सुबह तिथि समाप्ति पर फल-दूध से व्रत का पारण करें।  

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बुद्ध पूर्णिमा का पौराणिक महत्व

हिंदू धर्म के अनुसार, पूर्णिमा का दिन पूरा चंद्रमा दिखाई देता है, जो अंधकार का नाश और ज्ञान के प्रकाश को दर्शाता है। इस दिन भगवान विष्णु के कूर्म (कछुए) अवतार का जन्म हुआ था, जिसने समुद्र मंथन के समय मंदराचल पर्वत को अपनी पीठ पर धारण किया। ऐसा कहा जाता है कि इस अवतार ने देवताओं को अमृत प्राप्त करने में मदद की थी।

इसके अलावा यह दिन गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण का भी प्रतीक है। हिंदू परंपरा में बुद्ध को विष्णु का नौवां अवतार माना जाता है। इस तिथि पर सत्यनारायण पूजा का विशेष महत्व है, जो परिवार में सुख-समृद्धि और शांति लाती है। शास्त्रों में कहा गया है कि पूर्णिमा व्रत से पूर्व जन्मों के पाप नष्ट होते हैं। साथ ही, चंद्र दोष दूर होता है और मोक्ष की प्राप्ति का रास्ता खुलता है। 

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