Raksha Bandhan Special: रक्षाबंधन का त्योहार हर भाई-बहन के लिए खास होता है। इस साल 2026 में राखी का पर्व 28 अगस्त शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं उसके सुख-समृद्धि और अच्छे भविष्य की कामनी करती है और भाई अपनी बहनों की रक्षा का वादा करते है।
हालांकि आज के समय में बाजार में रंग-बिरंगी, सजी-धजी राखियों से लेकर सोने-चांदी की राखियों तक का ट्रेंड देखने को मिल जाएगा। लेकिन हिंदू शास्त्र में किसी भी तीज-त्योहार की शोभा सिर्फ महंगी चीजें खरीदने से नहीं बढ़ती, बल्कि आपका विश्वास, प्रेम, श्रद्धा का भाव उस त्योहार को खास बना देता है। ठीक इसी तरह राखी का असली मूल्य उसकी कीमत में नहीं, बल्कि आपकी भावनाओं का सार होता है। तो चलिए जानते है हिंदू शास्त्र में राखी को लेकर क्या नियम है।
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हिंदू शास्त्रों में राखी को ‘रक्षासूत्र’ कहा गया है। ये रक्षासूत्र बुरी शक्तियों से बचाने और सकारात्मता की ओर इशारा करता है। धार्मिक दृष्टि से राखी चाहे कैसे भी हो, सोने-चांदी की हो या एकदम सामान्य, लेकिन राखी बांधने से पहले रक्षासूत्र बांधने की परंपरा है। रक्षासूत्र तीन रंगों लाल, पीले और सफेद रंग से मिलकर बनता है। ऐसा कहा जाता है कि इन रंगों में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है।
सनातन धर्म शास्त्रों में रेशम या सूती धागे से बना रक्षासूत्र शुभ माना जाता है। पारंपरिक रूप से इसमें लाल, पीले और सफेद रंग का प्रयोग किया जाता है। इन रंगों को ब्रह्मा, विष्णु और महेश से जोड़ा जाता है। तीनों रंग न मिलें तो लाल और पीले धागे से भी रक्षासूत्र बांधने की परंपरा है।