Rajya Sabha Election: मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध राज्यसभा के लिए चुन लिए गए हैं। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त होने के बाद यह स्थिति बनी, जिसके चलते चुनाव में कोई मुकाबला नहीं रहा। जानकारी के अनुसार, नामांकन वापसी की समय सीमा समाप्त होने के बाद तीनों सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ हो गया। इसके बाद विधानसभा परिसर में सभी विजयी उम्मीदवारों को निर्वाचन प्रमाण पत्र सौंप दिए गए। भाजपा की ओर से तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को राज्यसभा के लिए निर्वाचित घोषित किया गया है।
नटराजन को लेकर राजनीतिक विवाद
दूसरी ओर, कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन निरस्त होने के बाद राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। इस फैसले को चुनौती देते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में रिटर्निंग अधिकारी के फैसले को गलत, पक्षपातपूर्ण और कानून के विरुद्ध बताया गया है और इसे तुरंत रद्द करने की मांग की गई है।
कोर्ट ने जल्द सुनवाई पर जताई सहमति
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जल्द सुनवाई पर सहमति जताई है। न्यायालय की पीठ में जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस चंदूरकर शामिल हैं। हालांकि कोर्ट ने राज्यसभा चुनाव के परिणामों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इस कारण तीनों सीटों पर निर्विरोध चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ गई। कोर्ट इस याचिका पर 12 जून को सुनवाई करेगा। तब तक राज्यसभा के निर्वाचित सदस्यों की स्थिति यथावत बनी रहेगी।
कांग्रेस कर रही प्रदर्शन की तैयारी
इसी बीच, राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, मध्य प्रदेश कांग्रेस के सभी विधायकों को दिल्ली बुलाया गया है, जहां वे पार्टी नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। कांग्रेस इस पूरे मामले को लेकर प्रदर्शन की तैयारी भी कर रही है और वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में आगे की रणनीति तय की जाएगी। पार्टी ने राष्ट्रपति से भी मिलने के लिए समय मांगा है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने निर्वाचन प्रक्रिया पर उठाए सवाल
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन नियमों का पालन करते हुए दाखिल किया गया था, लेकिन उसे गलत तरीके से खारिज कर दिया गया। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए “काला दिन” बताया और निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल उठाए। इस पूरे घटनाक्रम के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में तनाव बढ़ गया है और मामला अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर आगे बढ़ता नजर आ रहा है।
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