Political News: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा हमला किया। उन्होंने प्रधान पर छात्रों का अपमान करने का आरोप लगाया और मांग की मांग की। उन्होंने कहा कि वे देश के युवाओं से माफ़ी मांगें और अपने पद से इस्तीफ़ा दें।
सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म 'X' पर राहुल गांधी ने एक पोस्ट कर आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अहंकारी हो गई है और अब उन छात्रों को निशाना बना रही है जो अपने अधिकारों, निष्पक्ष परीक्षाओं और रोज़गार के मौकों को लेकर चिंताएं ज़ाहिर कर रहे हैं। उन्होंने लिखा कि सत्ता के अहंकार में डूबी मोदी सरकार अब उस मुकाम पर पहुंच गई है जहां शिक्षा मंत्री उन छात्रों को 'आतंकवादी' कह रहे हैं जो सिर्फ़ अपने अधिकारों, निष्पक्ष परीक्षाओं और सुरक्षित भविष्य की मांग कर रहे हैं।
राहुल गांधी ने आगे आरोप लगाया कि बार-बार परीक्षा के पेपर लीक होने और शिक्षा व्यवस्था की नाकामियों ने देश भर के लाखों छात्रों के भविष्य पर बुरा असर डाला है। उन्होंने कहा, "ज़रा सोचिए, जिसकी नाकामियों की वजह से इतने सारे पेपर लीक हुए, जिसके शासन में 20 बच्चों की जान चली गई, जिसने लाखों युवाओं के भविष्य को अंधेरे में धकेल दिया। वह आज परेशान बच्चों और आवाज़ उठाने वालों को 'आतंकवादी' कह रहा है। लेकिन यह कोई नई बात नहीं है। किसानों, यानी देश का पेट भरने वालों को 'पेशेवर आंदोलनकारी और परजीवी' कहा गया। सवाल पूछने वालों को 'देश-विरोधी' करार दिया गया। और अब, युवाओं को 'आतंकवादी' कहा जा रहा है।
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पिछले विरोध-प्रदर्शनों का ज़िक्र करते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार की आलोचना करने वालों और असहमति जताने वालों को बुरे नामों से बुलाने का पुराना इतिहास रहा है। उन्होंने कहा, "जो कोई भी सरकार से सवाल करता है, उसे देशद्रोही करार दे दिया जाता है। बस यही उनकी पूरी राजनीति है। धर्मेंद्र प्रधान इस देश के लाखों युवाओं से तुरंत माफ़ी मांगें और अपनी नाकामियों के लिए इस्तीफ़ा दें। रही बात मेरी, तो आप मुझ पर जितना चाहें उतना हमला कर सकते हैं।
देश के शिक्षा ढांचे की आलोचना दोहराते हुए गांधी ने कहा कि उन्होंने पहले भी कोटा में यह मुद्दा उठाया था और आगे भी उठाते रहेंगे। राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में आगे कहा, "मैंने कोटा में भी यही कहा था और अब फिर कह रहा हूं। आज यह शिक्षा व्यवस्था सिर्फ़ उगाही का धंधा बनकर रह गई है। मैं इसे ऐसे ही नहीं चलने दूंगा। हर बच्चे को सस्ती और अच्छी शिक्षा मिले और परीक्षाएं निष्पक्ष हों। इस बात के लिए मैं हमेशा आवाज़ उठाता रहूंगा।