Sonam Wangchuk Ends Hunger Strike: NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में सोनम वांगचुक ने अपनी 26 दिवसीय भूख हड़ताल समाप्त कर दी है। उन्होंने शुक्रवार को केंद्र सरकार से लिखित आश्वासन मिलने के बाद अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने का ऐलान किया। ये फैसला उन्होंने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में लिया।
सोनम वांगचुक का वीडियो मैसेज
अपनी 26 दिवसीय भूख हड़ताल को समाप्त करते हुए सोनम वांगचुक ने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो पोस्ट की। जिसमें उन्होंने कहा ‘प्रणाम, मित्रों। आज, 26वें दिन, मैं आप सभी के साथ एक विशेष समाचार साझा करना चाहता हूं। अभी रात के लगभग 12:30 बज रहे हैं। कुछ देर पहले, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह मुझसे यहां मिलने आए थे। सर्वोच्च निकाय के शीर्ष नेता भी उपस्थित थे। जैसा कि आप जानते हैं, इससे पहले अलग-अलग राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसद यहां आए, उन्होंने अपने हस्ताक्षर दिए और हमसे भूख हड़ताल समाप्त करने का अनुरोध किया। उन्होंने हमें आश्वासन दिया कि वे संसद में NEET परीक्षा के प्रश्न पत्रों और परीक्षा प्रणाली के मुद्दे पर चर्चा करेंगे।‘
वांगचुक ने आगे बताया कि इससे पहले मौखिक आश्वासन दिए गए थे, लेकिन उन्होंने औपचारिक दस्तावेज पर जोर दिया, जिसके कारण उनका विरोध समाप्त होने में दो दिन की देरी हुई। उन्होंने कहा ‘सरकार की ओर से आए मंत्रियों ने भी यही आश्वासन दिया था। पिछले दो दिनों से एक तरह की कठिन बातचीत चल रही थी क्योंकि मुझे ये आश्वासन लिखित में चाहिए थे। इसमें दो दिन और लग गए, और जरूरत पड़ने पर मैं और भी ज्यादा समय तक बैठा रहता, लेकिन आखिरकार आज उन्होंने लिखित में आश्वासन दे दिया है।‘
इसके बाद वांगचुक ने केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ अपनी मुलाकात के बाद सरकार द्वारा किए गए विशिष्ट वादों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने मृत छात्रों के परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करने पर सहमति जताई है। वांगचुक ने आगे जोर देते हुए कहा कि सरकार ने भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली की औपचारिक विधायी समीक्षा करने की प्रतिबद्धता जताई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर बोलते हुए वांगचुक ने स्वीकार किया कि हालांकि सरकार द्वारा कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं दी गई है, लेकिन उन्होंने दीर्घकालिक संघर्ष और छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है और आज उन्होंने लिखित आश्वासन दिए हैं। बता दें, यह सफलता महत्वपूर्ण संसदीय समर्थन और गहन बातचीत के बाद मिली है।
सोनम वांगचुक ने रखी सरकार के सामने 3 मांगे
- पहली मांग यह है कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं और 20 जुलाई को 'संसद चलो' मार्च में भाग लेने वालों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई आदि नहीं की जाएगी।
- दूसरी मांग यह है कि NEET पेपर लीक मामले में जिन बच्चों ने अपनी जान गवाई हैं, उनके परिवार को उचित मुआवजा दिया जाएं।
- तीसरी मांग यह है कि NEET पेपर लीक मामले में और परीक्षा प्रणाली सुधारने के लिए सरकार की जवाबदेही तय करने पर संसद में गहन चर्चा और बहस होगी।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर वांगचुक ने क्या कहा?
अपने वीडियो संदेश में वांगचुक ने कहा ‘मेरे पास दो विकल्प थे - या तो मैं कई हफ्तों तक भूख हड़ताल पर रहूँ, और शायद इससे मेरी जान चली जाए। लेकिन आपमें से हजारों लोग पिछले दो-तीन हफ्तों से मुझसे कह रहे हैं कि मेरा जीवन महत्वपूर्ण है, और संघर्ष जारी रखने के लिए मुझे जीवित रहना होगा... लेकिन मुझे यह भी विश्वास नहीं है कि हमने यह हासिल नहीं किया है। मेरी सोच अलग है। अगर वह (धर्मेंद्र प्रधान) ऐसा नहीं करते, इस्तीफा नहीं देते, तो इससे बच्चों या हमें कोई नुकसान नहीं होगा; नुकसान सरकार को ही होगा। इस छोटे से मुद्दे को न सुलझाकर वे खुद को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए था।‘
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