Monsoon 2026: भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। दक्षिण-पश्चिम मानसून ने भारत में प्रवेश की तैयारी पूरी कर ली है और मौसम विभाग के अनुसार 4 जून को केरल तट पर इसकी दस्तक हो सकती है। इसके साथ ही देशभर में बारिश के मौसम की शुरुआत मानी जाएगी। अब लोगों का इंतजार जल्द ही खत्म होने वाला है और अगले कुछ हफ्तों में मानसून पूरे देश को कवर कर लेगा।
मौसम विभाग ने दी जानकारी
मौसम विभाग के मुताबिक, मानसून समुद्र से नमी लेकर आने वाली हवाओं का एक बड़ा सिस्टम है। ये हवाएं अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से पानी से भरे बादलों को भारत की ओर लेकर आती हैं। यही बादल देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश कराते हैं और गर्मी से राहत देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों में जमीन का तापमान समुद्र के मुकाबले ज्यादा बढ़ जाता है। इसी कारण समुद्र से नमी वाली हवाएं जमीन की ओर बढ़ती हैं। जब ये हवाएं भारत पहुंचती हैं तो बादलों का रूप लेकर बारिश करती हैं। यही प्रक्रिया हर साल मानसून को जन्म देती है।
इन शहरों में पहुंच चुका मानसून
मानसून केरल पहुंचने के बाद तेजी से आगे बढ़ता है। जून के पहले सप्ताह में यह कर्नाटक, तमिलनाडु, गोवा और आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों तक पहुंच जाता है। जून के दूसरे सप्ताह में महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में मानसून सक्रिय हो जाता है। मुंबई और पुणे में आमतौर पर 10 से 11 जून के आसपास मानसून पहुंचता है। जून के तीसरे सप्ताह तक मानसून मध्य प्रदेश, गुजरात, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश तक पहुंच जाता है। इसके बाद जून के आखिरी सप्ताह और जुलाई के पहले दिनों में दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड में बारिश शुरू होने की संभावना रहती है। राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में भी जुलाई की शुरुआत तक मानसून पहुंच जाता है।
कश्मीर और लद्दाख में कब तक पहुंचेगा मानसून
मौसम विभाग का कहना है कि मानसून के आगमन की घोषणा केवल बारिश के आधार पर नहीं की जाती। इसके लिए बारिश की मात्रा, हवा की दिशा, नमी और अन्य मौसम संबंधी मानकों का अध्ययन किया जाता है। यदि मौसम सामान्य रहा तो जुलाई के मध्य तक मानसून कश्मीर और लद्दाख तक पहुंच जाएगा। इस तरह लगभग 45 दिनों में मानसून पूरे देश को अपनी चपेट में ले लेता है। हालांकि मौसम की परिस्थितियों के अनुसार इसकी रफ्तार और समय में थोड़ा बदलाव संभव है। देशभर के किसानों, आम लोगों और व्यापारियों की नजर अब मानसून की प्रगति पर है, क्योंकि अच्छी बारिश खेती और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
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