Bihar News:बिहार में मोकामा-मुंगेर फोरलेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के निर्माण की तैयारियां तेज हो गई हैं। सड़क परियोजना के लिए निर्माण सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मुंगेर जिले के जमालपुर ब्लॉक के इंद्रुख में प्लांट और स्टोरेज सुविधा स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इसके लिए महाराष्ट्र और पंजाब की एक कंपनी करीब 40 एकड़ जमीन पांच साल के लिए लीज पर लेने की तैयारी कर रही है। जमीन को लीज पर लेने की प्रक्रिया अंतिम चरण में बताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, कंपनी की एजीएम पूनम कुमार और प्रोजेक्ट मैनेजर ने प्रस्तावित प्लांट के लिए चयनित जमीन का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जमीन की उपलब्धता और उसकी उपयुक्तता का जायजा लिया। साथ ही जमीन मालिकों से बातचीत कर आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई। कंपनी की ओर से संकेत दिए गए हैं कि जमीन लीज पर लेने की प्रक्रिया पूरी होते ही यहां प्लांट स्थापित करने का काम शुरू किया जा सकता है। इस प्लांट में सड़क निर्माण के लिए जरूरी सामग्री का भंडारण किया जाएगा, ताकि परियोजना के निर्माण कार्य के दौरान सामग्री की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और काम में देरी न हो।
कई इलाकों से होकर गुजरेगा फोरलेन कॉरिडोर
प्रस्तावित मोकामा-मुंगेर फोरलेन सड़क डाकरा नाला नहर के पास से होकर गुजरेगी। इसके दायरे में सफियासराय, गौरीपुर, शांतिनगर, रामपुर, इंद्रुख, फुलका और भालार समेत कई इलाके आएंगे। परियोजना को लेकर आसपास के क्षेत्रों में गतिविधियां तेज हो गई हैं। मोकामा-मुंगेर ग्रीनफील्ड फोरलेन कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 82.4 किलोमीटर निर्धारित की गई है। इस महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना पर अनुमानित 4,447.38 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। परियोजना के तहत लखीसराय जिले में 57.9 किलोमीटर, मुंगेर जिले में 14.7 किलोमीटर और पटना जिले के मोकामा क्षेत्र में 8.4 किलोमीटर सड़क का निर्माण प्रस्तावित है।
48 मौजों से अधिग्रहित होगी 847 एकड़ जमीन
इस परियोजना के लिए लखीसराय जिले के पांच ब्लॉकों में आने वाले 48 मौजों यानी राजस्व गांवों से करीब 847 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। सड़क निर्माण के लिए 60 मीटर चौड़ी जमीन का प्रस्ताव रखा गया है। फोरलेन कॉरिडोर के पूरा होने के बाद मोकामा, मुंगेर और लखीसराय के बीच आवागमन पहले से अधिक सुगम होने की उम्मीद है। इससे यात्रियों को बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा और यातायात का दबाव कम करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों, परिवहन और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
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