
Adani US Indictment: भारत के सबसे बड़े कारोबारी चेहरे गौतम अडानी एक बार फिर आरोपों के घेरे में आ गए हैं।उन परआरोप है कि उन्होंने भारत में सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स के ठेके हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को लगभग 2,250करोड़ रुपये की रिश्वत दी।
वहीं अब इस मामले में अमेरिकी अदालत में भी कार्यवाही चल रही है, क्योंकि अडानी समूह ने इन परियोजनाओं के लिए अमेरिकी निवेशकों से फंड जुटाए थे। इन प्रोजेक्ट्स से अडानी समूह को अगले 20वर्षों में लगभग 2अरब डॉलर का मुनाफा होने की उम्मीद जताई गई थी।
आंध्र प्रदेश सरकार पर भी उठे सवाल
इस मामले के बीच आंध्र प्रदेश सरकार की सौर ऊर्जा योजना पर विवाद गहरा गया है। राज्य सरकार ने किसानों को 9घंटे मुफ्त सौर ऊर्जा देने का प्रस्ताव रखा था। इसके तहत 7,000मेगावाट सौर ऊर्जा खरीदने का खाका था। इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक दलों, उपभोक्ताओं और अदालतों में तीखी बहस हो रही है।
मुख्य विवाद और मुद्दे
प्रतिस्पर्धात्मक बोली प्रक्रिया का उल्लंघन
के. रामकृष्णा की याचिका में आरोप है कि राज्य सरकार ने विद्युत अधिनियम, 2003का उल्लंघन करते हुए प्रतिस्पर्धात्मक बोली प्रक्रिया को नजरअंदाज किया। इस प्रक्रिया का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सबसे कम दरों पर ऊर्जा उपलब्ध कराना है।
ऊंची कीमत पर सौर ऊर्जा की खरीदारी
पय्यावुला केशव की याचिका में कहा गया है कि बाजार में सौर ऊर्जा ₹1.99प्रति यूनिट मिल रही है, लेकिन राज्य सरकार ₹2.49प्रति यूनिट की उच्च दर पर समझौता कर रही है। इससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है।
समझौतों की पारदर्शिता पर सवाल
उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार, SECI और अडानी समूह के बीच हुए समझौतों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए APERC को सार्वजनिक सुनवाई आयोजित करने का निर्देश दिया है।
राज्य सरकार और APERC का पक्ष
राज्य सरकार का कहना है कि यह समझौता किसानों के हित में किया गया है। इसके माध्यम से लंबी अवधि में बिजली की लागत घटेगी। APERC ने भी इस प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए इसे जनहित में बताया है।
अदालत का निर्णय और भविष्य की राह
अप्रैल 2024 में उच्च न्यायालय का अंतिम फैसला इस समझौते के भविष्य को तय करेगा। अगर अदालत यह मानती है कि बोली प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ या दरें अत्यधिक हैं, तो यह समझौता रद्द हो सकता है।
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