Parliament Session:संसद का मानसून सत्र जारी है। एक तरफ राज्यसभा और लोकसभा में हंगामा हो रहा है। वहीं, दूसरी तरफ हंगामे के बीच कई बिल भी लोकसभा से पास हो रहे हैं। राज्यसभा में मंगलवार यानी 4 अगस्त को जन्म और मृत्यु का पंजीकरण संशोधन विधेयक 2026 को ध्वनिमत से पास करा लिया गया।
संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बनने की दिशा में आगे बढ़ गया है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विपक्ष के हंगामे के बीच यह विधेयक सदन में पेश किया गया। उन्होंने कहा कि इसका मकसद जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है।
रजिस्ट्रेशन में देरी होने पर क्या होगा
नए संशोधन के तहत एक साल से अधिक और 2 साल के भीतर जन्म या मृत्यु का रजिस्ट्रेशन कराने के लिए जिला मजिस्ट्रेट, उप-मंडल मजिस्ट्रेट या उनकी ओर नियुक्त कार्यपालक दंडाधिकारी की इजाजत लेनी होगी। अगर किसी जन्म या मृत्यु का पंजीकरण 2 साल से अधिक की देरी से कराया जाता है, तो अब केवल न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही पंजीकरण होगा। इसके अलावा अनुमति देने से पहले संबंधित अधिकारी को दी गई जानकारी और दस्तावेज की पूरी जांच करनी होगी, ताकि रिकॉर्ड सही और प्रमाणिक रहे।
मौजूदा व्यवस्था में हुआ बदलाव
सरकार ने साफ कहा कि एक साल तक के रजिस्ट्रेशन की मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पहले की तरह जन्म या मृत्यु की सूचना 21 दिन के भीतर देने पर सामान्य रूप से पंजीकरण होगा। 21 दिन से लेकर एक साल एक की देरी होने पर तय नियमों के अनुसार विलंब शुल्क देकर रजिस्ट्रेशन कराया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि हर बच्चे का जन्म समय पर दर्ज, क्योंकि इसी आधार पर उसे शिक्षा, पहचान, सरकारी योजनाओं और अन्य कानूनी अधिकारी का लाभ मिलता है।
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