India Venezuela Relation: भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठ सकता है। तेल संपन्न देश वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज 3 से 7 जून तक भारत दौरे पर हैं। इस दौरान दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार और निवेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण समझौते होने की संभावना है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े संकट ने वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित किया है। भारत अपनी तेल आपूर्ति को सुरक्षित रखने और आयात के स्रोतों में विविधता लाने के प्रयास कर रहा है। ऐसे में वेनेजुएला भारत के लिए एक अहम विकल्प बनकर उभर रहा है।
राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज की प्रधानमंत्री मोदी के साथ होगी बैठक
विदेश मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक होगी। बैठक में ऊर्जा, व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, फार्मास्यूटिकल्स, परिवहन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी। हाल के महीनों में भारत वेनेजुएला से तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल हो गया है। रिपोर्टों के अनुसार, मई 2026 तक भारत प्रतिदिन लगभग 4.27 लाख बैरल वेनेजुएलाई तेल आयात कर रहा था। इस तरह भारत, अमेरिका के बाद वेनेजुएला का दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार बन गया है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
विशेषज्ञों का मानना है कि वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ने पर भारत की खाड़ी देशों पर निर्भरता कम हो सकती है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी तरह का संकट या युद्ध जैसी स्थिति बनती है, तब भी वेनेजुएला से तेल की आपूर्ति जारी रह सकती है। इससे भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा भारतीय निजी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज भी हाल के समय में वेनेजुएला के कच्चे तेल की बड़ी खरीदार कंपनियों में शामिल रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत समझौते होते हैं, तो आने वाले समय में भारत को पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति के मामले में अधिक स्थिरता मिल सकती है। इससे वैश्विक संकटों के बावजूद देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और आयात के नए विकल्प भी खुलेंगे।
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