
Himachal Pradesh Landslide: हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड ने बीतें दो महीनों में भारी तबाही मची हुई है जिसकी वजह से लोगों की जीवन पूरी तरह से अस्त व्यस्त हो गया है। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में गुरुवार को लैंडस्लाइड होने के कुछ ही सेकेंड में 7 इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गई। प्रदेश में पिछले 24 घंटे से हो रही बारिश के कारण 12 लोगों की मौत हो गई, इनमें 7 मौतें मंडी और शिमला में लैंडस्लाइड की वजह से हुईं। भारी बारिश के चलते कुल्लू-मनाली हाईवे को भी बंद कर दिया गया। कई घर और दुकानें तबाह हो गईं। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि ये तबाही सिर्फ बारिश की वजह हुई लैंडस्लाइड से है या हम पहाड़ों पर बड़ी लापरवाही कर रहे हैं।इस बार बारिश के मानसून में भारी बारिश के कारण कुल 709 सड़कें बंद हो गई हैं। हिमाचल प्रदेश सरकार का अनुमान है कि 24 जून, जब राज्य में मानसून आया था, तब से जारी बारिश के कहर से सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को कुल 8,014.61 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
कुल्लू में हुई लैंडस्लाइड से पहले लोगों को शिफ्ट किया गया
कुल्लू में गुरुवार सुबह हुए लैंडस्लाइड की अगर बात की जाएं तो इस घटना के घटने से पहले ही लोगों का शुफ्ट कर लिया गया था। ऐसे में किसी को भी जान नुकसान नहीं हुआ है। जब पहाड़ धंसा तो ये इमारतें ताश के पत्तों की तरह गिरने लगी। एक इमारत गिरी, फिर दूसरी, फिर तीसरी, फिर चौथी, फिर पांचवी और फिर ऊपर से इमारतें गिरने लगी। ऐसा क्यों हुआ कि एक इमारत गिरी तो दूसरी गिर गई? इसका जवाब पहाड़ ही है दरअसल, पहाड़ तो एक ही है. ये मैदानी इलाका नहीं है कि जहां एक इमारत अगर गिरेगी, तो बहुत हद तक उसके ठीक बगल वाले पर असर होता है। ये तो पहाड़ है और एक पहाड़ पर अगर बहुत सारी इमारतें होंगी, तो सबके सब पर असर होगा. ये सच है कि भारी बारिश हो रही है. इसमें भी कोई दो राय नहीं कि हालात बहुत खराब हैं, लेकिन हमें समझना होगा कि ये पहाड़ हैं... यहां लैंडस्लाइड नहीं होगा इसकी गारंटी कोई नहीं दे सकता।
हिमाचल के सीएम सुक्खू ने दी जानकारी
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पिछले हफ्ते ही कहा था कि बिना वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल किए लोगों ने घर बनाए है। नाले के ऊपर इमारते बना दी गई है और लोगों को लगता है कि पानी ड्रेनेज सिस्टम में जा रही है लेकिन वो पहाड़ में जा रहा है और पहाड़ कमजोर होते जा रहे है। जब सीएम ये सभी बाते बता रहे है तो उन्हें ये भी बताना चाहिए कि उनकी सरकार बनने के बाद इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए है।
प्रदेश में ऐसी घटनाएं होने से तबाही निश्चित
हिमाचल प्रदेश में जिस तरह की घटनएं हो रही है उससे साफ है कि कहीं न कहीं निर्माण में नियमों पर मुख्य रूप से ध्यान दिया जा रहा है। इस पूरे मामले में वैज्ञानिक कहते है कि आज कोई इमारत दरकेगा, कल कोई और इमारत दरकेगा. लेकिन अगर ऐसा ही रहा तबाही निश्चित होनी है। इसके लिए सभी तंत्र जिम्मेदार हैं. सरकार, प्रशासन, कॉर्पोरेट, इंसान... ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमलोग ऐसी घटनाओं से न तो सबक लेते हैं और न इसे सुधारने का कोई काम करते है। तलहटी में चट्टानों के कटाव और जल निकासी की उचित व्यवस्था की कमी के कारण हिमाचल में ढलानें भूस्खलन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो गई है।
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