Search KhabarFast

Press ESC to close

कोलन कैंसर की वजह से कोशिकाएं बदल रही हैं अपनी पहचान, नई स्टडी में हुआ खुलासा

कोलन कैंसर की वजह से कोशिकाएं बदल रही हैं अपनी पहचान, नई स्टडी में हुआ खुलासा

Colorectal cancer: वैज्ञानिकों ने एक आणविक स्विच की पहचान की है जो यह समझाने में मदद कर सकता है कि कोलोरेक्टल कैंसर अधिक घातक क्यों हो जाता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि जब GATA6 नामक जीन-विनियमन कारक का स्तर कम हो जाता है, तो कैंसर कोशिकाएं अपनी सामान्य पहचान खो देती हैं और अत्यधिक अनुकूलनीय, भ्रूण जैसी कोशिकाओं में परिवर्तित हो जाती हैं जो रक्तप्रवाह के माध्यम से फैल सकती हैं और यकृत में नए ट्यूमर बना सकती हैं।

कोलोरेक्टल कैंसर कैसे फैलना है?

अध्ययन से पता चलता है कि यह परिवर्तन मुख्य रूप से जीन के सक्रियण या दमन में बदलाव के कारण होता है, न कि नए आनुवंशिक उत्परिवर्तन के कारण। दरअसल, वील कॉर्नेल मेडिसिन और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने एक प्रमुख कारक की पहचान की है जो कोलोरेक्टल कैंसर को यकृत तक फैलने में मदद कर सकता है। उनके निष्कर्ष बताते हैं कि GATA6, एक प्रतिलेखन कारक जो यह नियंत्रित करने में मदद करता है कि कौन से जीन सक्रिय या निष्क्रिय होते हैं, की कमी कैंसर कोशिकाओं को एक अधिक आदिम और अनुकूलनीय अवस्था में धकेल सकती है जिससे मेटास्टेसिस संभव हो जाता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह परिवर्तन कैसे होता है?  दरअसल, कोलोरेक्टल कैंसर के सबसे घातक पहलुओं में से एक को रोकने के लिए नई रणनीतियों को जन्म दे सकता है। GATA6 सामान्य रूप से आंत की परत बनाने वाली कोशिकाओं में एक आणविक "पहचान रक्षक" के रूप में कार्य करता है, जिससे उन्हें अपने विशिष्ट कार्यों को बनाए रखने में मदद मिलती है। हालांकि, 22 जून को सेल स्टेम सेल में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि कोलोरेक्टल कैंसर से पीड़ित चूहों और मनुष्यों दोनों के लिवर मेटास्टेसिस में GATA6 का स्तर काफी कम होता है।

Also read: व्यायाम मांसपेशियों की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को क्यों उलट देता है? इस शोध में मिलेंगे सारे जवाब

GATA6 की कमी से क्या होता है?

शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि GATA6 की कम अभिव्यक्ति खराब रोगी परिणामों से जुड़ी है। एक बार जब कोलोरेक्टल कैंसर अपने मूल स्थान से आगे फैल जाता है, तो उपचार कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है, और मेटास्टेसिस इस बीमारी से होने वाली मौतों का प्रमुख कारण बना रहता है। बता दें, काफी समय से वैज्ञानिक ऐसे आनुवंशिक उत्परिवर्तनों की खोज कर रहे हैं जो लिवर मेटास्टेसिस को ट्रिगर कर सकते हैं, लेकिन कोई स्पष्ट प्रेरक उत्परिवर्तन सामने नहीं आया है। लेकिन ये नया अध्ययन एक अलग तंत्र की ओर इशारा करता है।

वील कॉर्नेल में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और हेपेटोलॉजी विभाग में चिकित्सा के सहायक प्रोफेसर डॉ. नोरिहिरो गोटो, जिन्होंने इस शोध का सह-नेतृत्व किया, ने कहा ‘हमने पाया कि GATA6 की कमी एक महत्वपूर्ण स्विच के रूप में कार्य करती है जो प्राथमिक ट्यूमर में कैंसर कोशिकाओं को गैर-मेटास्टेटिक से प्रो-मेटास्टेटिक में बदल सकती है।‘ उन्होंने आगे कहा ‘हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि लिवर मेटास्टेसिस को बढ़ावा देने के लिए एपिजेनेटिक परिवर्तन अधिक महत्वपूर्ण हो सकते हैं।‘

कैंसर कोशिकाएं मेटास्टैटिक कैसे बनती है?

डॉ. नोरिहिरो गोटो के अनुसार, लिवर मेटास्टेसिस से लिए गए ऊतक नमूनों का अध्ययन मेटास्टेटिक प्रक्रिया का सीमित अवलोकन ही प्रदान करता है। उन्होंने कहा ‘जब शोधकर्ता लिवर मेटास्टेसिस से रोगी के नमूनों का विश्लेषण करते हैं, तो हम मेटास्टेटिक प्रक्रिया के प्रारंभिक चरणों में होने वाले महत्वपूर्ण संकेतों को समझने में विफल रहते हैं।‘

ऑर्गेनॉइड्स को चूहों की बड़ी आंत में प्रत्यारोपित किया

इन शुरुआती घटनाओं को बेहतर ढंग से समझने के लिए, शोध दल ने लिवर मेटास्टेसिस से प्राप्त ऑर्गेनॉइड्स का उपयोग करके एक प्रयोगशाला मॉडल विकसित किया। कैंसर कोशिकाओं के ये लघु, त्रि-आयामी समूह वास्तविक ट्यूमर की कई विशेषताओं को दोहराते हैं। वैज्ञानिकों ने ऑर्गेनॉइड्स को चूहों की बड़ी आंत में प्रत्यारोपित किया, जहां उन्होंने तेजी से आक्रामक ट्यूमर बनाए जो बाद में लिवर तक फैल गए। इस प्रक्रिया को कई बार दोहराने से टीम को यह देखने में मदद मिली कि कैंसर कोशिकाएं धीरे-धीरे मेटास्टेटिक क्षमता कैसे प्राप्त करती हैं।

उनके प्रयोगों से पता चला कि GATA6 की कमी से वंश प्लास्टिसिटी को बढ़ावा मिलता है, जो कोशिकाओं की अपनी पहचान और व्यवहार को बदलने की क्षमता है। जब GATA6 अनुपस्थित था, तो कोलोरेक्टल कैंसर कोशिकाओं ने वैकल्पिक आनुवंशिक कार्यक्रमों को सक्रिय किया और एक लचीली भ्रूण जैसी अवस्था अपना ली।

उन्होंने पाया कि ये रूपांतरित कोशिकाएं रक्तप्रवाह के माध्यम से यात्रा करने और दूर के अंगों में ट्यूमर स्थापित करने के लिए बेहतर रूप से सुसज्जित थीं। इस प्रकार की कोशिकीय पुनर्रचना का उपयोग शरीर सामान्यतः घाव भरने और तनाव के अनुकूलन के दौरान करता है। हालांकि, कैंसर में, यही प्रक्रिया मेटास्टेसिस को बढ़ावा दे सकती है।

Leave Your Comments



संबंधित समाचार

इंसान जोखिम लेगा या नहीं...दिमाग फैसला लेने से पहले ही दे देता है सिग्नल, शोधकर्ताओं का दावा

Brain signals before Decision: सैन फ्रांसिस्को स्थित कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय (UCSF) और बर्कले स्थित कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने मानव मस्तिष्क के दो पड़ोसी क्षेत्रों की पहचान की है जो जोखिम लेने का निर्णय लेते समय प्रतिस्पर्धा करते प्रतीत होते हैं। उन्होंने पाया कि उनकी गतिविधि निर्णय लेने से लगभग आधा सेकंड पहले ही उसकी भविष्यवाणी कर सकती है।

Navratri 2026: 11 अक्टूबर से शुरू होगा नौ दिवसीय पर्व, जानें घटस्थापना और दशहरे की तारीख

अक्टूबर का महीना इस बार धार्मिक रूप से खास रहने वाला है। पितृ पक्ष के समाप्त होने के बाद मां दुर्गा की आराधना का नौ दिवसीय पर्व शारदीय नवरात्र शुरू होगा।

World Mental Health Day: पढ़ाई का प्रेशर बच्चों की मेंटल हेल्थ पर पड़ रहा भारी, NCERT सर्वे में 81% छात्रों ने जताई चिंता

Health Tips: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, दुनिया में 10 से 19 साल की उम्र के लगभग हर सात में से एक किशोर किसी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या से प्रभावित होता है। भारत में भी स्कूली छात्रों की मानसिक स्थिति को लेकर चिंता जताई जाती रही है। NCERT के 2022 के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण सर्वे में 81 प्रतिशत छात्रों ने पढ़ाई, परीक्षा और रिजल्ट को लेकर चिंता महसूस करने की बात कही थी।

लाइव अपडेट

बड़ी खबरें

Khabar Fast