Nepal Flood: नेपाल में भीषण फ्लैश फ्लड यानी अचानक आई बाढ़ के बाद हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। राहत और बचाव अभियान के बीच आज नुवाकोट में एक ही घर से 23 शव बरामद किए गए। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 962 लोगों की मौत की खबर है, जबकि करीब 4 हजार लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों की तलाश के लिए अलग-अलग इलाकों में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
क्या है सबसे बड़ी चिंता?
सबसे बड़ी चिंता त्रिशूली-3बी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को लेकर है। यहां करीब 118 लोग अब भी फंसे हुए हैं। इनमें इंजीनियर, अधिकारी और मजदूर शामिल बताए जा रहे हैं। पिछले कई दिनों से इन लोगों से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। बचाव दल उन्हें बाहर निकालने की कोशिश कर रहा है, लेकिन सुरंग में भरा भारी मलबा और दलदल राहत कार्य में बड़ी बाधा बन रहा है। खराब मौसम ने भी बचाव अभियान को मुश्किल बना दिया है।
हाइड्रोपावर परियोजनाओं पड़ असर
बताया जा रहा है कि ग्लेशियर के टूटने के बाद भारी मात्रा में पानी, कीचड़ और चट्टानें तेजी से नीचे की ओर आईं। इससे नेपाल के कई हिस्सों में भारी तबाही मची। बाढ़ ने घरों, सड़कों और पुलों को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ हाइड्रोपावर परियोजनाओं के बुनियादी ढांचे को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। रासुवा और मध्य नेपाल के कई इलाके इसकी चपेट में आए हैं।
बचाव दल के लिए बढ़ी चुनौती
बचाव दल को अब एक और बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ के पानी में बहकर दूर तक पहुंचे शवों की पहचान करना मुश्किल हो रहा है। कई परिवार अपने लापता रिश्तेदारों की तलाश में अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं और बरामद शवों की तस्वीरों के जरिए पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं।
महामारी फैलने का बढ़ा खतरा
आपदा के करीब सात दिन बाद प्रभावित इलाकों में महामारी फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। मलबे और दलदल में दबे शवों के सड़ने से दुर्गंध फैलने लगी है। ऐसे में राहत एजेंसियों के सामने अब बचाव अभियान के साथ-साथ सफाई और संक्रमण रोकने की बड़ी चुनौती है। खराब सड़कें, टूटे हुए पुल और बारिश की आशंका राहत कार्य को और मुश्किल बना रही है।
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