
Delhi elections 2025: दिल्ली विधानसभा चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए चुनाव आयोग ने सोशल मीडिया गतिविधियों पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है। राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों द्वारा किए जा रहे प्रचार, विज्ञापनों और पोस्ट की जांच का कार्य दिल्ली चुनाव कार्यालय को सौंपा गया है।
चुनाव आयोग ने साफ किया है कि सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री, भ्रामक दावे और अनावश्यक खर्च पर तुरंत कार्रवाई होगी। यह कदम 2014के लोकसभा चुनाव में लागू दिशा-निर्देशों के आधार पर उठाया गया है। तब सोशल मीडिया के प्रचार में तेजी देखी गई थी।
सोशल मीडिया पर भी लागू होगी आचार संहिता
2014में सोशल मीडिया को आदर्श आचार संहिता के दायरे में लाया गया। फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म्स को चुनावी नियमों का पालन करना अनिवार्य किया गया। अब इन प्लेटफॉर्म्स पर झूठी खबरें और भ्रामक प्रचार पोस्ट करना पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा।
प्रत्याशियों को देना होगी जरूरी जानकारी
चुनाव आयोग के नए नियमों के अनुसार, प्रत्याशियों को नामांकन के समय अपनी ईमेल ID और अधिकृत सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी देनी होगी। इसके अलावा, इंटरनेट पर कोई भी विज्ञापन डालने से पहले आयोग से अनुमति लेना जरूरी होगा।
इन सामग्रियों पर रहेगा प्रतिबंध
- असत्यापित विज्ञापन
- रक्षाकर्मियों की तस्वीरें
- नफरत फैलाने वाले भाषण
- झूठी खबरें
ऐसी कोई भी सामग्री, जो शांति, सामाजिक सद्भाव और चुनाव प्रक्रिया को बाधित कर सकती है, पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगी।चुनाव आयोग का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और सभी उम्मीदवारों को समान अवसर देना है। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए यह फैसला लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने के लिए बेहद जरूरी है।
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