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महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा सियासी उलटफेर, एकनाथ शिंदे की शिवसेना को सपोर्ट करेगी MNS

महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा सियासी उलटफेर, एकनाथ शिंदे की शिवसेना को सपोर्ट करेगी MNS

Maharashtra civic polls: महाराष्ट्र के कल्याण-डोंबिवली नगर निगम पर हुए (केडीएमसी) चुनाव के बाद राजनीति में बड़ा मोड़ देखने को मिला है। आमतौर पर एक-दूसरे की विरोधी मानी जाने वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने अब शिंदे गुट की शिवसेना को समर्थन देने का एलान किया है। यह घोषणा एमएनएस के पूर्व विधायक प्रमोद (राजू) पाटिल ने पार्टी के पांच पार्षदों की ओर से की। इससे पहले शिवसेना के सभी 53 पार्षद नवी मुंबई स्थित कोंकण संभागीय आयुक्त कार्यालय पहुंचे और अपने गुट का औपचारिक पंजीकरण कराया।उसी स्थान पर एमएनएस के पांचों पार्षदों ने भी अपनी प्रक्रिया पूरी की और शिवसेना को समर्थन देने की घोषणा कर दी। इसे नगर निगम की सत्ता संरचना के लिहाज से अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शिवसेना या तो अपने दम पर नगर निगम में सरकार बनाने की कोशिश कर रही है या फिर गठबंधन में अपनी मोलभाव की स्थिति मजबूत कर रही है। 
 
क्या कहते हैं  चुनाव के नतीजे?
 
बात अगर 122 सदस्यीय कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में हुए चुनाव की करें तो, 16 जनवरी को आए नतीजों में शिंदे गुट की शिवसेना को 53, भाजपा को 50, शिवसेना (यूबीटी) को 11 मनसे पांच, कांग्रेस दो और एनसीपी (एसपी) को एक सीटें मिली। बता दें कि इस नगर निगम में सत्ता बनाने के लिए 62 सीटों की जरूरत होती है। फिलहाल शिवसेना के 53 पार्षदों के साथ एमएनएस के 5 पार्षदों का समर्थन मिलने से संख्या 58 हो गई है।
 
यूबीटी गुट भी संपर्क 
 
जानकारी के अनुसार, शिवसेना (शिंदे गुट) के संपर्क में उद्दव यूबीटी गुट के कुछ पार्षद भी बताए जा रहे हैं। अगर इनमें से कुछ का समर्थन मिलता है तो शिवसेना बहुमत के आंकड़े के और करीब पहुंच सकती है। वहीं इस मामले में कल्याण लोकसभा सांसद श्रीकांत शिंदे ने इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा कि मनसे ने शहर के विकास को ध्यान में रखते हुए शिवसेना को समर्थन दिया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शिवसेना और भाजपा ने नगर निगम चुनाव महा-युति गठबंधन के तहत मिलकर लड़ा था।
 
मेयर किसका होगा?
 
गौरतलब है कि कल्याण-डोंबिवली नगर निगम पर हुए चुनाव के बाद मेयर पद को लेकर अटकलें तेज हो गई है। कारण है कि अभी भी मेयर कौन होगा? किसका होगा? ये तस्वीर अभी भी धुंधली है।  मेयर पद को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं है। भाजपा की ओर से ढाई-ढाई साल का कार्यकाल मांगने की चर्चा है। श्रीकांत शिंदे ने कहा कि मेयर महायुति से ही होगा और इस पर अंतिम फैसला उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण मिलकर लेंगे।

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