UPSC Success Story: वो कहते है न मेहनत करने वालों की कभी भी हार नहीं होती है। अगर मेहनत करोगे तो सफलता जरूर मिलेगी। इस वाक्य से प्रेरित होकर हरियाणा की छोरी ने वो कर दिखाया है कि जो शायद ही कोई पाएं। महेंद्रगढ़ के गांव से निकली दिव्या तंवर ने अपनी कड़ी मेहनत से बिना किसी कोचिंग के पहली ही कोशिश में IPS बनकर अपने माता-पिता का नाम रोशन किया। इतना ही नहीं, दिव्या दूसरी कोशिश में IAS बनकर साबित कर दिया कि मेहनत करने से हर मुकाम हासिल हो सकता है।
बचपन में ही पिता को खोया
बता दें, दिव्या तंवर महेंद्रगढ़ जिले के छोटे से गांव निम्बी की रहने वाली हैं। लेकिन उनका बचपन काफी मुश्किलों भरा था। बचपन में ही उनके पिता का साया सिर से उठ गया था। जिस वजह से परिवार आर्थिक बोझ के तले दबता जा रहा था। घर-परिवार चलाने के लिए दिव्या ने मां दिन में खेतों में मजदूरी और रात में कपड़े सिलने का काम करती। उनके पास फोन, लैपटॉप या वाई फाई कनेक्शन जैसी सुविधाएं तक नहीं थी। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और बच्चों की पढ़ाई पर पूरा ध्यान दिया।
दिव्या बचपन से ही पढ़ाई में रुचि रखती थी। सरकारी स्कूलों के जरिए उन्होंने शुरुआती शिक्षा ली। फिर नवोदय विद्यालय से अपनी स्कूलिंग पूरी की। लेकिन उसी दौरान SDM बनने का सपना बुनना शुरु कर दिया। महेंद्रगढ़ के सरकारी महिला कॉलेज से बीएससी की डिग्री हासिल की।
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बिना कोचिंग के UPSC की तैयारी
कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद दिव्या ने UPSC की तैयारी शुरू की। दिव्या का मानना था, खूब मन लगाकर मेहनत से पढों, तभी सफलता मिलेगी। इसी मकसद को ध्यान में रखते हुए पढ़ाई के लिए दिन-रात एक कर दिए और बिना किसी कोचिंग के वो कर दिखाया, जो शायद हर किसी के लिए नामुमकिन होता।
21 साल की उम्र में बनीं IPS
दिव्या को अपनी कड़ी मेहनत का फल साल 2021 में मिला, जब उन्होंने पहली कोशिश में ही UPSC CSE 2021 पास किया। ऑल इंडिया रैंक 438 हासिल की। हैरानी की बात यह है कि 21 साल की उम्र में दिव्या देश की सबसे युवा IPS अधिकारियों की लिस्ट में शामिल हो गईं।
22 साल की उम्र में बनीं IAS
इसके बाद दिव्या ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। IPS बनने के बाद उन्होंने साल 2022 में फिर से UPSC की परीक्षा दी। इस दौरान अपनी दूसरी कोशिश में ऑल इंडिया रैंक 105 हासिल की और 22 साल की उम्र में IAS अधिकारी बन गईं। दिव्या की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो संसाधनों की कमी के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। सपने देखने का अधिकार सबके पास हैं, लेकिन सपने सिर्फ उन्हें लोगों के पूरे होते है जो सही दिशा में मेहनत करें और कभी हार न मानें।