केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब देशभर में पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर सरकार पर लगातार सवाल उठ रहे थे। NEET-UG समेत कई परीक्षाओं को लेकर छात्रों और विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा था और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की मांग की थी। धर्मेंद्र प्रधान भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहे हैं। वह ओडिशा से आते हैं और उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी। कॉलेज के दिनों में वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी ABVP से जुड़े थे। इसके बाद साल 1998 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली।
ABVP के राज्य सचिव बने
संगठन में काम करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई। साल 1993 में वह ABVP के राज्य सचिव बने और 1995 में उन्हें संगठन का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया। इसके बाद उन्होंने बीजेपी में भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। धर्मेंद्र प्रधान ने चुनावी राजनीति की शुरुआत ओडिशा से की। साल 2000 से 2004 तक वह ओडिशा विधानसभा के सदस्य रहे। इसी दौरान साल 2001 में उन्हें बीजेपी युवा मोर्चा यानी BJYM का ओडिशा अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद 2002 में वह बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव बने।
अहम विभागों के मंत्री रह चुके धर्मेंद्र प्रधान
राजनीति में आगे बढ़ते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। वह पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, इस्पात मंत्रालय और कौशल विकास मंत्रालय जैसे अहम विभागों के मंत्री रह चुके हैं। साल 2021 में उन्हें केंद्र सरकार में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई। शिक्षा मंत्री बनने के बाद उन्होंने नई शिक्षा नीति, डिजिटल शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में सुधार जैसे मुद्दों पर काम किया। हालांकि, हाल के वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर उनकी भूमिका पर सवाल उठाए गए।
अब किसे मिलेगा शिक्षा मंत्री का पद
NEET-UG परीक्षा विवाद के बाद छात्रों और कई संगठनों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग शुरू कर दी थी। देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए। विपक्ष ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमला बोला। शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा सौंपते हुए कहा कि छात्रों का भविष्य सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था में सुधार और लोगों का भरोसा बनाए रखने को प्राथमिकता बताया। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनके लंबे राजनीतिक सफर में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। अब देखना होगा कि सरकार शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी किसे सौंपती है और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं। इसे लेकर कुछ नाम सामने भी आए हैं, जिसमें प्रमुख नाम सुकांत मजूमदार, जयंत चौधरी और राघव चड्ढा शामिल हैं।
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