Delhi Air Pollution: कुछ दिन पहले लगातार हुई बारिश से दिल्ली की हवा काफी साफ हो गई थी, लेकिन अब राजधानी में फिर से प्रदूषण तेजी से बढ़ गया है। इसकी वजह स्थानीय प्रदूषण नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया से आए धूल भरे तूफान को बताया जा रहा है। सोमवार सुबह दिल्ली की वायु गुणवत्ता (AQI) तेजी से खराब हुई और 'बहुत खराब' श्रेणी के करीब पहुंच गई। रविवार को दिल्ली का औसत AQI 261 दर्ज किया गया, जो 'खराब' श्रेणी में आता है। वहीं सोमवार सुबह 9 बजे AQI बढ़कर 294 तक पहुंच गया।
दिल्ली-एनसीआर के शहरों के हालत खराब
दिल्ली-एनसीआर के अन्य शहरों में भी हालात खराब रहे। ग्रेटर नोएडा का AQI 352 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में है। गुरुग्राम में AQI 271 और नोएडा में 261 रहा। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले, 9 जुलाई को दिल्ली का AQI केवल 48 था, जो इस साल का सबसे कम स्तर था। लगातार बारिश के कारण हवा साफ हो गई थी और कई दिनों तक वायु गुणवत्ता 'अच्छी' और 'संतोषजनक' श्रेणी में बनी रही। लेकिन अब केवल तीन दिनों में AQI 200 से ज्यादा अंक बढ़ गया है।
क्या है प्रदूषण की वजह?
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के अनुसार, इस बार प्रदूषण की मुख्य वजह स्थानीय धूल या वाहन नहीं हैं। आयोग ने बताया कि अफगानिस्तान, ईरान और पाकिस्तान के इलाकों से उठी धूल तेज हवाओं के साथ उत्तर-पश्चिम भारत और दिल्ली-एनसीआर तक पहुंच गई है। इससे हवा में PM10 यानी बड़े धूल कणों की मात्रा अचानक बढ़ गई।
गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शशि कांत ने भी बताया कि सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि दक्षिण पाकिस्तान और आसपास के क्षेत्रों से धूल भरी हवाएं भारत की ओर आई हैं। इसी कारण दिल्ली और आसपास के इलाकों में हवा की गुणवत्ता बिगड़ी है। हालांकि AQI 200 से ऊपर पहुंचने के बावजूद CAQM ने फिलहाल ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू नहीं किया है। आयोग का कहना है कि यह प्रदूषण अस्थायी है और धूल भरे तूफान के कमजोर पड़ने के बाद अगले दो दिनों में हवा की गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
इसके बावजूद दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) और एनसीआर के सभी प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को धूल रोकने के उपाय तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग लगातार स्थिति पर नजर रख रहा है और जरूरत पड़ने पर आगे के फैसले लिए जाएंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रदूषण सर्दियों में बनने वाले स्मॉग से अलग है। इस बार हवा में PM10 धूल कणों की मात्रा ज्यादा बढ़ी है, जबकि स्थानीय प्रदूषण का असर अपेक्षाकृत कम है। मौसम में बदलाव के साथ आने वाले दिनों में स्थिति सामान्य होने की संभावना जताई जा रही है।
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